कर्नाटक के नाटक में पिता के आज्ञाकारी बेटे कुमारस्वामी ने ठुकारया भाजपा का प्रस्ताव

बंग्लूरू !  कर्नाटक की राजनीति में जो उठापटक का दौर चल रहा है उसमें एक बडी. संस्कारी खबर आई है. बताया जा रहा है कि कुमारस्वामी का पूरा झुकाव भाजपा के साथ जाने को लेकर था. लेकिन आज्ञाकारी बेटे की तरह वे इस बार पिता के सम्मान के आगे झुक गये. अनेक बर्षों पूर्व उन्होंने कर्नाटक में सत्ता पाने के लिये अपने पिता एचडी दैवगौडा. से बगाबत कर दी थी. इस बार बगाबत का पूरा मन था किन्तु कुमार स्वामी के भीतर ऐसा पितृ प्रेम जागा कि वे चाह कर भी भाजपा की ओर से मिल रहे निमंत्रण को असवीकार करने पर विवश हो गये. खबर यह है कि जेडीएस नेता कुमारस्वामी को सीएम बनाने की पेशकश भाजपा ने भी की थी, लेकिन अपने पिता के सम्मान की खातिर इस बार उन्होंने यह ऑफर ठुकरा दिया. कुमार स्वामी को संभव है कि इस बात का सदा दुख रहे क्योंकि यदि वे भाजपा के साथ जाते तो वे बेहतर और स्थिर विकल्प पाते किन्त लगता है उनके जीवन में राजनीतिक उठापटक का दौर अभी चलता रहेगा.

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, बीजेपी ने जेडीएस के साथ मिलकर सरकार बनाने की पेशकश की थी, लेकिन इस बार वह अपने पिता के खिलाफ नहीं जाना चाहते थे, जैसा कि साल 2006 में उन्होंने किया था. कुमारस्वामी ने यह संकेत दिया कि बीजेपी ने कुछ संपर्क सूत्रों के मदद से उन तक अपनी बात पहुंचाई थी. एचडी कुमारस्वामी ने कहा कि जेडीएस कर्नाटक में बीजेपी के साथ मिलकर सरकार नहीं सकती थी , लेकिन वह इस बार अपने पिता को आहत नहीं कर सकते, जैसा कि साल 2006 में किया था. पूर्व में साल 2006 में अपने पिता एचडी देवगौड़ा के खिलाफ जाकर कुमारस्वामी ने बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बनाई थी.

कुमारस्वामी ने कहा, ‘पहले मेरे कार्यों की वजह से जो बदनामी हुई थी, इस बार उसे साफ करने का मौका था. मैंने जिंदगी में सिर्फ एक बार अपने पिता के निर्देश का उल्लंघन किया था. मेरी वजह से राष्ट्रीय स्तर के नेताओं ने मेरे पिता की सेकुलर सोच पर सवाल उठाना शुरू कर दिया था. मेरे इस निर्णय से पिता को काफी दुख पहुंचा था और इसका असर उनकी सेहत पर भी पड़ा.’

बहुत सारे अखबार और खोजियों की तरफ से आई खबरों के अनुसार  जेडीएस (एस) के सूत्रों के हवाले से बताया है कि भारतीय जनता पार्टी ने सरकार बनाने के लिए ढाई-ढाई साल तक के सीएम की पेशकश की थी. यानी पहले ढाई साल तक कुमारस्वामी मुख्यमंत्री रहें और भाजपा का उपमुख्यमंत्री रहे और ढाई साल के बाद बीजेपी का सीएम आए.  कुमारस्वामी ने कहा, ‘मैं सत्ता पर कब्जा नहीं करना चाहता, हम सत्ता के भूखे लोग नहीं हैं. देश में एक राजनीतिक शून्य है जिसे अब भरने का मौका है. बीजेपी अच्छा प्रशासन कैसे दे सकती है, जब वह जोड़-तोड़ में लगी हुई है. पीएम मोदी  काले धन पर अंकुश की बात कर रहे हैं, लेकिन हमारे विधायकों को 100 करोड़ रुपये तक का ऑफर दिया जा रहा है. हालांकि ये बताने में नकायाब रहे कि 100 करोड की आफर का पता कैसे चला.

भाजपा के अध्यक्ष अमित शाह के प्रति पनपते प्रेम का आरोप तो कांग्रेस बहुत पहले ही कुमार स्वामी पर लगा चुकी थी. बीते 1 मई को खबर आयी थी कि कांग्रेस ने भाजपा और जेडीएस नेता कुमारस्वामी के बीच अंदर ही अंदर चुनावी गठबंधन का आरोप लगाया है. कांग्रेस का आरोप था कि कुमारस्वामी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के बीच दिल्ली में मुलाकात हुई थी. 13 अप्रैल को एक चॉर्टर्ड प्लेन से कुमार स्वामी के दिल्ली आने के कागजात भी हैं. हालांकि, देवगौड़ा ने साफ-साफ कहा था कि उनकी पार्टी कभी भी भाजपा के साथ के साथ नहीं जाएगी.

कैसे बहुमत दिखायेगी सरकार………..

देशभर में कर्नाटक चुनावों में रूचि रखने वाले राजनीतिक पंडिंतो को भी यह सवाल चकित कर रहा है कि केसे भाजपा  या उसके अध्यक्ष कर्नाटक की येदुरप्पा सरकार को राज्य के विधान भवन में बहुमत पारित होने में सहायता करेंगे. हरेक तबके के मन में बहुमत के लिये आवश्यक विधायकों की संख्या को लेकर अनेकों प्रश्न हैं.येदुरप्पा नें तीसरी बार सरकार बना ली है. देखना है कि कैसे सदन में अपना समर्थन सिद्द कर पाते हैं.

( न्यूजबिरयानी समाचार सेवा)