पहले 434 और इस बार 4203 शहरों में अपना इंदौर ऐसे निकला सबसे आगे

( आलेख- कीर्ति राणा )

इंदौर!अपना इंदौर लगातार दूसरी बार स्वच्छता सर्वेक्षण में नंबर वन रहा है। यह हम सब के अनुशासन के साथ ही निगम अमले की मेहनत का परिणाम है। पहले जब नंबर वन बने थे तब मुक़ाबला 434 शहरों से था। इस बार चुनौती की गंभीरता इसी से समझी जा सकती है कि मुकाबला4203 शहरों में नंबर वन की प्रतिस्पर्धा का था। पहली बार की ख़ुशी से अधिक इसीलिए दूसरी बार नंबर वन बनने की ख़ुशी है। इस बार सर्वेक्षण में जाँच बिंदु भी बढ़ गए थे और अन्य शहरों ने इंदौर के स्वच्छता अभियान के तौर तरीक़ों से यह भी सीख-समझ लिया था कि नंबर वन आने के लिए किस तरह काम करना चाहिए। बाक़ी शहर इंदौर को फालो करते रहे और इंदौर कुछ और बेहतर, कुछ और अनूठा करने की धुन में आगे बढ़ता रहा और फिर से नंबर वन का ख़िताब झपटने का चमत्कार कर दिखाया।
बीते वर्ष जब इंदौर को नंबर वन का ख़िताब मिला था तब सोशल साइट पर लोगों ने मज़ाक़ में लिया और खूब जोक्स भी चले थे। यह भी प्रचारित किया था कि सब सरकारी जोड़तोड़ का खेल है।इंदौर में भाजपा को मजबूत करना है इसलिए इंदौर, भोपाल को ख़िताब बाँट दिए। इस साल फिर से नंबर वन का जो ख़िताब मिला है तो अब माहौल पिछली बार जैसा नहीं है। महापौर मालिनी गौड़ से लेकर मनीष सिंह के विरोधी भी इस ख़िताब की ख़ुशी मना रहे हैं।
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                                            नंबर वन के कारण मिली उज्जैन की कलेक्टरी
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इंदौर को लगातार दो साल नंबर वन का ख़िताब दिलवाने में निगमायुक्त मनीष सिंह का काम स्वर्णाक्षरों में लिखे जाने के समान ही है।यह कहना अतिश्ययोक्ति नहीं है कि इंदौर में उनका जो परफ़ॉर्मेंस रहा उसके पुरस्कार स्वरूप ही उज्जैन में कलेक्टरी मिली।
दूसरी बार नंबर वन होना उन्हीं की मेहनत का नतीजा है । यही कारण रहा कि शाम को इंदौर को ख़िताब मिलने की घोषणा हुई और मनीष सिंह रात में इंदौर पहुँच गए। महापौर तो भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह के साथ रैली में व्यस्त रहीं। महापौर सचिवालय पर निगमायुक्त आशीष सिंह के साथ मनीष सिंह सफाईकर्मियों को मिठाई खिलाकर इस सफलता का सारा श्रेय उन्हें देते रहे।
जिस नगर निगम को मज़ाक़ में कभी नरक निगम कहा जाता था। जहाँ सफाईकर्मियों की मनमानी, कर्मचारी संगठनों की राजनीति का बोलबाला था, रमेशजी और कैलाश जी के नाम पर सैकड़ों कर्मचारी सिर्फ रजिस्टर पर साईन करने जितना अहसान करने आते थे।राजनेताओं का संरक्षण प्राप्त अधिकारी लाभ-शुभ वाले काम में ही तत्परता दिखाते थे।उसी नगर निगम में अनुशासन और कार्य संस्कृति के डंडे से पूरे स्टॉफ को मनीष सिंह ने समान रूप से ठीक किया।
दो नंबर क्षेत्र के नेताओं के नाम से धौंस ज़माने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों को सार्वजनिक रूप से चेतावनी दे डाली कि यदि वेतन नगरनिगम से ले रहे हो तो काम मेरे मुताबिक करना होगा और राजनीति करना है तो आज से ही मुक्त हो जाओ। महापौर और क्षेत्र क्रमांक दो के पार्षदों के बीच चलने वाले राजनीतिक मतभेद के बावजूद निगमायुक्त ने वार्डों के विकास काम में इस तनातनी को आड़े नहीं आने दिया।
अब यदि मनीष सिंह कहते हैं कि इंदौर में माइक्रो लेबल पर कचरे के निस्तारण पर काम ज़रूरी हो गया है तो इसके लिए वे लोकमान्य नगर में घर घर कचरा निपटान व्यवस्था का उदाहरण भी देते हैं कि बाक़ी कालोनियाँ में भी इसे अपनाना चाहिए। ऐसा करने से कचरा परिवहन से निजात मिलेगी, होने वाला वेयरॉन होगा, पर्यावरण के लिए भी यह ज़रूरी है।

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भोपाल में सारे सूत्र थे विवेक अग्रवाल के हाथ में
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इंदौर के स्वच्छता सर्वेक्षण से लेकर स्मार्ट सिटी के तहत तोड़फोड़, चौड़ीकरण, सर्वे से लेकर वाहनों की ख़रीदारी, रात दिन सफाई, स्टॉफ की आवश्यकता से लेकर राजनीतिक दबाव, विधायकों-पार्षदों की नाराजी जैसे मामलों में निगमायुक्त मनीष सिंह बिना विचलित हुए काम करते रहे तो इसकी ख़ास वजह थी प्रमुख सचिव नगरीय प्रशासन-विकास विवेक अग्रवाल का भरोसा। टीम के लीडर के रूप में विवेक अग्रवाल जैसा अधिकारी हो तो मातहत हर चुनौती का सामना कर सकते हैं। जिलों में काम करने वाले अधिकारियों के सामने कई बार ऐसे विकट हालात भी बनते रहे हैं कि वे भोपाल के वरिष्ठ अधिकारियों के भरोसे पर सख्त निर्णय तो ले लेते थे लेकिन राजनीतिक बखेड़ा खड़ा होने पर वल्लभ भवन के अधिकारी उन्हें अपने हाल पर छोड़ देते थे। विवेक अग्रवाल अपने विभाग के दिलों में पदस्थ अधिकारियों के लिए ऐसे आदर्श टीम लीडर रहे हैं जो सारे विवादों के लिए सीएम से लेकर सींएस तक खुद को ज़िम्मेदार बताते रहे और अपनी टीम की तारीफ़ करने से भी नहीं चूके।उनकी इसी वर्किंग स्टाइल से मातहत अधिकारी न सिर्फ बेख़ौफ़ होकर काम करते हैं बल्कि उनकी शैली को भी अपने प्रशासकीय दायित्व में मॉडल की तरह अपनाते हैं।

इसलिए ख़ुश हैं विवेक अग्रवाल


दूसरे वर्ष इंदौर, भोपाल और चंडीगढ़ के नाम ख़िताब होने से सर्वाधिक ख़ुश कोई है तो पीएस विवेक अग्रवाल। इंदौर से वे करीब छह साल जुड़े रहे हैं, भोपाल में करीब दस वर्षों से विभिन्न पदों का दायित्व संभालते हुए सीएम के अतिविश्वस्त अधिकारियों में शामिल हैं। चंडीगढ़ में बाल्यकाल गुज़रा, शिक्षा आदि के कारण जुड़ाव है। यही सारे कारण हैं कि इन तीनों शहरों के नाम ख़िताब होने से उनकी ख़ुशी कुछ ज्यादा है।मुख्यमंत्री ने इंदौर के पुन: नंबर वन होने पर अपने ट्विट में विभागीय मंत्री माया सिंह के अलावा जिन दो अधिकारियों का उल्लेख किया है उनमें विवेक अग्रवाल और उनकी टीम के मनीष सिंह का नामोल्लेख किया है।
आइए जानते हैं किन बिंदुओं पर हुआ अपने शहर की साफ़ सफाई का आकलन—
– खुले में शौच से मुक्ति
– कूड़े का कलेक्शन
– कूड़े को उठाकर ले जाने के लिए परिवहन की व्यवस्था
– वैज्ञानिक तरीक़े से कूड़े का प्रसंस्करण
– सर्वे के दौरान, अलग-अलग दल जा करके शहरों का निरीक्षण करेंगे।
– नागरिकों से बात करके उनकी प्रतिक्रिया लेंगे
– स्वच्छता एप के उपयोग का तथा विभिन्न प्रकार के सेवा-स्थलों में सुधार का विश्लेषण करेंगे।
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0 ये थे स्वच्छता सर्वेक्षण के 6 प्रमुख घटक
– व्यक्तिगत घरेलू शौचालय
– सामुदायिक शौचालय
– सार्वजनिक शौचालय
– ठोस अपशिष्ट प्रबंधन
– सूचना एवं शिक्षित संचार और सार्वजनिक जागरुकता
– क्षमता निर्माण
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0 इस तरह निर्धारित किए गए थे 4000 अंक
इन तीन कैटिगरी पर हुआ सर्वे
– सर्विस लेवल प्रोग्रेस 35 प्रतिशत
– डायरेक्ट आॅब्जर्वेशन 30 प्रतिशत
– सिटिजन फीडबैक 35 प्रतिशत
– 4 हजार अंकों का होगा सर्वेक्षण
– सर्विस लेवल प्रोग्रेस 1400 अंक
(इसमें एमसीएफ कागजी डाटा उपलब्ध कराएगा)
– डायरेक्ट आॅब्जर्वेशन 1200 अंक
(इसमें टीम फील्ड में जाकर चेक करेगी)
– डायरेक्ट सिटिजन फीडबैक 1400 अंक
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0 हर साल बढ़ते गए शहर
– 2016 में 73 शहर थे
– 2017 में 500 शहर किए गए
– 2018 में 4041 शहर होंगे
– शहरों का स्वच्छता मूल्यांकन तीन पार्ट ए, बी और सी के आधार पर होगा।
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0 स्वच्छता के मानदंडों को वेटेज
– खुले में शौच से मुक्ति (ओडीएफ) में प्रगति – 30%
– ठोस कचरे को एकत्रित कर ले जाना – 30%
– ठोस कचरे का प्रसंस्करण और निपटान – 25%
– सूचना, शिक्षा तथा संचार 5%
– क्षमता निर्माण – 5%
– नवाचार 5%
– कुल अंक 4000
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0 मूल्याकंन वेटेज
– सेवा स्तर पर प्रगति (बुनियादी ढांचागत निर्माण, प्रक्रियाएं, परिचालन) 35%
– नागरिक प्रतिक्रिया 35%
– स्वतंत्रता क्षेत्र अवलोकन 30%
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– कुल 100%
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इस पर भी मिलें अंक
– स्वच्छ मार्केट
– स्वच्छ स्कूल
– स्वच्छ हास्पिटल
– स्वच्छ टॉयलेट
– रेलवे स्टेशन
– बस स्टैंड

कीर्ति राणा इंदौर से जुडे. वरिष्ठ पत्रकार हैं