मुंबई प्लेन क्रैश – दोपहर के करीब साढ़े बारह बज रहे थे. मुंबई के जुहू एयरपोर्ट एक 12 सीटर चार्टर्ड प्लेन उड़ान भरने की तैयारी कर रहा था. प्लेन पुराना था और इसे ठीक करने के बाद इसकी जांच करनी थी. उड़ान सफल हो, इसके लिए बाकायदा पूजा की गई और रनवे पर नारियल फोड़ा गया. इसके बाद VT-UPZ किंग एयर C-90 प्लेन में सवार हुए कैप्टन पीएस राजपूत, को पायलट मारिया जुबेरी, असिस्टेंस मेंटेनेंस इंजीनियर सुरभि और एयर क्राफ्ट टेक्नीशियन मनीष पांडे. एयर क्राफ्ट ने उड़ान भरी और देखते ही देखते वो हवा से बातें करने लगा. चारों लोग एयर क्राफ्ट को हवा में उड़ाते रहे और उसकी तकनीकी खामियों को जांचते रहे.

सबकुछ ठीक चल रहा था. करीब 20 मिनट तक सब ठीक रहा, अचानक पाइलट को लगा कि कुछ गड़बड़ हो रही है और जब तक वो गड़बड़ी को समझ पाता, एयर क्राफ्ट का बैलेंस पूरी तरह से बिगड़ चुका था. अब भी एयर क्राफ्ट को करीब तीन किलोमीटर की दूरी तय कर मुंबई मेन रनवे नंबर 27 पर लैंड करना था. लेकिन ऐसा नहीं हो सका. एयर क्राफ्ट का क्रैश होना निश्चित था. लेकिन जिस जगह पर उसे क्रैश होना था, उसके नीचे घनी आबादी थी. अगर प्लेन वहां गिरता तो सैकड़ों लोगों की जान जा सकती थी. लेकिन इस परिस्थिति में एयर क्राफ्ट में सवार सभी चारों की जान जाने ही वाली थी, लेकिन एयर क्राफ्ट के कैप्टन पायलट पीएस राजपूत ने हिम्मत नहीं हारी.

उन्हें अपनी और अपने साथियों की मौत तो सामने दिखाई दे रही थी, लेकिन वो उन सैकड़ों लोगों की जान बचाने की कोशिश कर रहे थे, जिनके ऊपर ये प्लेन क्रैश होना था. इसी दौरान उन्हें घनी बस्ती के बीच करीब 500 वर्ग मीटर का एक खाली प्लॉट दिखाई दिया, जहां काम चल रहा था. ये घाटकोपर का जागृति नगर इलाका था, जहां पर कोई भी नहीं था. लंच टाइम होने की वजह से वहां काम कर रहे करीब 30 मजदूर लंच करने गए हुए थे. कैप्टन पीएस राजपूत ने पूरी कोशिश करके प्लेन को जागृतिनगर इलाके में मोड़ दिया और उसे खाली प्लॉट में ले जाकर क्रैश करवा दिया. जब एयरक्राफ्ट जमीन से टकराया तो टकराने के साथ ही उसमें तेज धमाका हुआ और इसके साथ ही एयर क्राफ्ट में सवार सभी चार लोगों के चीथड़े उड़ गए.

टेस्ट पायलट थे पीएस राजपूत

पीएस राजपूत एक टेस्ट पायलट थे. 2007 में टेस्टिंग के ही दौरान राजस्थान में उनका एयरक्राफ्ट क्रैश कर गया था. उसमें पीएस राजपूत गंभीर रूप से घायल हो गए थे. इस हादसे के बाद कई दिनों तक वो अस्पताल में भर्ती रहे थे. ठीक होने के बाद वो चार अलग-अलग कंपनियों में बतौर टेस्ट पायलट काम कर रहे थे और इसके साथ ही वो वीआईपी लोगों के एयर क्राफ्ट उड़ाते थे. उनके परिवार में पत्नी और बेटा हैं. बेटा मर्चेंट नेवी में काम करता है.

26 साल पुराना था एयर क्राफ्ट, यूपी सरकार ने एक कंपनी को बेच दिया था

हादसे का शिकार हुआ एयरक्राफ्ट 20 साल पुराना था. 2014 तक ये एयर क्राफ्ट यूपी सरकार के पास था. आखिरी बार इसने 22 फरवरी 2008 को उड़ान भरी थी. उस दिन ये इलाहाबाद में क्रैश हो गया था और उसके बाद से इसे इस्तेमाल नहीं किया गया. यूपी सरकार इसे बेचने की कोशिश कर रही थी, लेकिन खरीदार नहीं मिल रहे थे. आखिर में 2014 में इसे मुंबई की एक निजी कंपनी यूवाई एविएशन को बेच दिया गया था.