चार्ली-चीता अब नहीं दे सकेंगे धोखा… महाराष्ट्र में पुलिस की  ई-पेट्रोलिंग शुरू..

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महाराष्ट्र में यूँ तो पुलिस महकमा अपनी कार्रवाहियों के लिये सख्त ही माना जाता है.पर अब देश में पहली बार राज्य की पुलिस अपने गश्ती दलों पर ई-पेट्रोलिंग के जरिये निगरानी रखना शुरू कर चुकी है.मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडनवीस के गृहनगर नागपुर में इसकी शुरूआत हुई है. नागपुर के विभिन्न पोलिस स्टेशन्स के अन्तर्गत आने वाले बीट पुलिसिंग क्षेत्र में चार्ली और चीता के नाम से पहचानी जाने वाली पुलिस गश्ती दल ई- पेट्रोलिंग के जरिये थाना-प्रभारी सहित पुलिस के आला अफसरों की निगरानी में रहेंगे.नागपुर समेत महाराष्ट्र राज्य के अन्य शहरों के लिये प्रस्तावित
ई-पेट्रोलिंग के प्रायोगिक तौर पर अच्छे नतीजों को देखते हुए इस योजना पर काम आरँभ हो गया है.

  नागपुर शहर जोन -१ की पुलिस उपायुक्त दीपाली मासिरकर नें बताया कि शहर के राणाप्रतापनगर, हुडकेश्वर, लकडगंज और सोनेगाँव थाना क्षेत्र में ई-पेट्रोलिंग की व्यवस्था शुरू की गई है. उन्होंने बताया कि पुलिस आयुक्त  डाँ. के वैंकटेश के निर्देशानुसार इस योजना जिसमे थाने के विभिन्न गश्ती दलों द्वारा विभिन्न बीट क्षेत्रों में नियमित रूप से निगरानी की जाती है. इस प्रकार थाना क्षेत्रों में बीट के अन्तर्गत आने वाले संवेदनशील स्थानों मंदिरों बैंक एटीएम सेंटरों स्कूलस् बिशेषकर गर्ल्स स्कूल सहित गश्त के लिये महत्वपूर्ण ठिकानों पर बार कोड किये हुए कुछ
कार्ड स्थापित किये गये हैं.जिनके जरिये ई-ट्रैकिंग की व्यवस्था की जाती है. इस प्रकार गश्ती दल हमेशा पुलिस के नियंत्रण कक्ष सहित आला अफसरों की निगरानी में होता है.

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ई-निगरानी के अमल में अव्वल राणाप्रतापनगर नागपुर के प्रभारी इंस्पेक्टर श्री शिवाजी गायकवाड.ने बताया कि संवेदनशील स्थानों पर बार कोड वाले कार्ड लगाये गये है. नियमित रूप से गश्त के लिये पहुँचने वाले दल को एक
विशेष मोबाइल हैंडसेट दिया गया है.इस हैंडसेट को संबधित बारकोड वाले कार्ड के पास ले जाया जाकर वहाँ से कोडिंग की जाती है. इस प्रकार जब पुलिस गश्ती दल संबँधित स्थान पर होता है तो वह नियंत्रण कक्ष के संपर्क
और निगरानी में होता है.

इस समूचे प्रकल्प में तकनीकी रूप से सहायता करने वाले जोसेफ जार्ज ने बताया कि उनकी संस्था Time Facility Services Pvt.Ltd के माध्यम से एक बिशेष साफ्टवेयर बनाया गया है. इस साफ्टवेयर से अलग अलग जगहों के लिये बार कोडिंग करके कार्ड बनाये गये हैं जो संबधित जगहों पर फिक्स किये गये हैं. जब पुलिस का दल नियमित गश्त के दौरान वहाँ जाता है तो बार कोड वाले कार्ड के जरिये दल की न केवल हाजिरी दर्ज होती है बल्कि अन्य सूचनायें भी दर्ज हो जाती हैं. श्री जोसेफ जार्ज ने बताया कि पुलिस दल के पास मौजूद मोबाइल फोन से ही मामूली इंटरनेट खर्च पर यह सब नियंत्रित होता है.गूगल मैपिंग के जरिये स्थानीय संवेदनशील गश्ती पाइंट्स के बार कोड बनाये गये हैं. ई-पेट्रोलिंग एक महत्वाकाँक्षी प्रकल्प है जो राज्यभर में पुलिस गश्तकी गतिविधियों पर आला अफसरों की लगातार निगरानी रखनें की प्रक्रिया को बढावा देगा. अपराधों के मामले में हाईटैक हो रहे अपराधियों से निपटने की हाईटैक तैयारी कर रही महाराष्ट्र पुलिस को इस मामले में देश में सबसे आगे रहने का श्रेय दिया जा सकता है. यदि देश के दूसरे राज्यों ने इस प्रकार की योजना लागू की तो  डी.सी पी दीपाली मासिरकर को इस बात का श्रेय दिया जा सकता है.

 

नागपुर से नीरज ओमप्रकाश श्रीवास्तव की रपट