राजस्थान के अलवर में एक जगह है अशोक टॉकीज. इसके ठीक पीछे एक पुरानी सी धर्मशाला है. नाम है नारायणी धर्मशाला. 1988 के साल में यहां एक संन्यासी आया. वेदों के श्लोक उसकी जबान पर होते थे. संस्कृत का अच्छा जानकार था. सबसे प्यार से बात करने वाला. संन्यासी कुछ समय तक इसी धर्मशाला में टिका रहा. इस संन्यासी का नाम था रामानुजाचार्य स्वामी कौशलेंद्र प्रपन्नाचारी.

रामानुज सम्प्रदाय से संबंध रखने वाले स्वामी कौशलेंद्र प्रपन्नाचारी ने धर्मशाला से निकल अलवर के काला कुआं एरिया में अपना डेरा जमाया. यहां उन्होंने एक वेद विद्यालय खोला. इसे नाम दिया मधुसूदन चतुर्वेद विद्यालय. बतौर आचार्य वो यहां वेद पढ़ाने लगे. इसके अलावा जगह-जगह घूमकर भागवत कथा भी करने लगे. धीरे-धीरे उनका प्रभाव बढ़ने लगा. देश के कई कोनों के लोग उनमें श्रद्धा रखने लगे. इस समय तक स्वामी जी ने अन्न खाना छोड़ दिया था और फल खाकर ज़िंदगी बिता रहे थे. यहां से उन्हें नया नाम मिला ‘फलाहारी बाबा.’

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के साथ फलाहारी बाबा

फलाहारी बाबा का बीजेपी के राजनेताओं से अच्छा संबंध रहा है. 21 जुलाई 2017 को जब बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह जयपुर पहुंचे तो यह 2018 के चुनाव की तैयारी की शुरुआत थी. बीजेपी ने इस मौके पर एक संत समागम का आयोजन भी किया था. फलाहारी बाबा इस संत समागम का हिस्सा थे. स्थानीय पत्रकार बताते हैं कि बाबा के विश्व हिन्दू परिषद और बजरंग दल से अच्छे संबंध रहे हैं.

इस महीने की 20 तारीख को फलाहारी बाबा एक बार फिर से सुर्ख़ियों में थे. यह कोई मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा या भागवत को लेकर आने वाली रूटीन खबर नहीं थी. उन पर छत्तीसगढ़ के विलासपुर की एक लड़की ने यौन शोषण का आरोप लगाया था.

नरेंद्र मोदी से मंत्रणा करते हुए फलाहारी बाबा

क्या था मामला

विलासपुर में रहने वाली इस लड़की का परिवार पिछले 25 साल से बाबा का भक्त था. जब भी बाबा विलासपुर जाते, लड़की के घर पर ही रुका करते थे. लड़की लॉ की पढ़ाई कर रही थी. पढ़ाई पूरी करने के बाद उसे इंटर्नशिप की जरूरत हुई. बाबा ने अपने संपर्कों के जरिए दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट के एक वकील के पास लड़की की इंटर्नशिप लगवा दी. इस इंटर्नशिप के खत्म होने पर उसे तीन हजार रुपए का चेक मिला था. लड़की ने घरवालों को यह बात बताई. घरवाले श्रद्धा में डूबे हुए थे. इसे बाबा का आशीर्वाद मान रहे थे. घरवालों ने सलाह दी कि यह चेक वो बाबा के चरणों में समर्पित करके आ जाए.

फलाहारी बाबा

7 अगस्त को लड़की दिल्ली से अलवर पहुंची. पहुंचते-पहुंचते शाम हो गई थी. उसने बाबा के दर्शन किए और तीन हजार का यह चेक उन्हें सौंप दिया. बाबा ने शाम ढल जाने का हवाला देते हुए लड़की को अलवर रुक जाने के लिए कहा. पुलिस को दिए बयान में आपबीती बताते हुए लड़की ने कहा कि शाम को करीब सात बजे बाबा ने उसे बेसमेंट में बने कमरे में बुलाया. वहां मौजूद वेद पढ़ने वाले छात्रों को बाबा ने शाम की आरती में हिस्सा लेने के लिए भेज दिया. इसके बाद बाबा ने अपने कमरे का दरवाजा बंद कर लिया.

लड़की के मुताबिक बाबा ने उससे कहा कि वो उसे विद्यादान देना चाहते हैं. उन्होंने लड़की की जीभ पर ओम लिखा और कहा कि इससे सारी विद्या उसके भीतर चली जाएगी. इसके बाद उन्होंने लड़की को बताया कि वो उसे एक भाई देना चाहते थे लेकिन उसकी मां काफी बूढ़ी हो चुकी हैं इसलिए वो ऐसा नहीं कर सकते. समय आने पर वो उसे एक बेटा देंगे जो बहुत तेजस्वी होगा. इसके बाद उन्होंने लड़की के साथ छेड़छाड़ शुरू कर दी.

फलाहारी बाबा

इस बीच एक छात्र ने आकर दरवाजा खटखटा दिया और लड़की बलात्कार से बच गई. लड़की का कहना है कि वो रात को आश्रम में रुकने के लिए मजबूर थी. सुबह उठते ही वो पहली ट्रेन से दिल्ली निकल गई. यहां से वो अपने घर विलासपुर गई. उसे पता नहीं था कि उसके पिता इस बात पर भरोसा करेंगे या नहीं. वो लंबे समय से बाबा के प्रति अंधश्रद्धा रखते आए थे.

उसने अपने पिता को यह बात बताई. इसके बाद 11 सितंबर को विलासपुर में बाबा के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाया गया. 20 सितंबर को विलासपुर पुलिस के कहने पर अलवर पुलिस ने बाबा के मधुसुदन सेवा आश्रम पर छापा मारा है. पुलिस के छापे के बाद बाबा ने खराब तबीयत का हवाला दिया और पास ही के एक निजी अस्पताल में भर्ती हो गए. अगले दिन बाबा का इलाज कर रहे डॉक्टर पंकज शर्मा का बयान आया कि बाबा की तबीयत एकदम दुरुस्त है.

फलाहारी बाबा

फिलहाल बाबा अस्पताल से बाहर निकलने के लिए तैयार नहीं है. पुलिस भी बाबा पर नजर बनाए हुए है. लड़की ने बयान में कहा कि रामरहीम को हुई सजा ने उसके मन में भरोसा पैदा किया. उसने तय किया कि वो बाबा का सच सबके सामने लाएगी. वहीं लड़की के पिता का कहना है कि उन्होंने फलाहारी बाबा को भगवान की तरह पूजा और बदले में उनको धोखा मिला.

पूरे मामले पर अलवर के सामाजिक कार्यकर्ता वीरेंद्र विद्रोही की बात हम सब को सुननी चाहिए. वो कहते हैं,

“हमारे समाज में औरतों को परवरिश के साथ सिखाया जाता है कि जान चली जाए लेकिन ‘इज्ज़त’ नहीं जानी चाहिए. धर्मगुरु समाज में ख़ास हैसियत रखते हैं. अक्सर पीड़िता के परिजन आरोपी धर्मगुरु के भक्त होते हैं. ऐसे में यौन शोषण की शिकार महिला अपनी बात कह ही नहीं पाती. ऐसे में वो शोषण के लंबे दुश्चक्र का शिकार हो जाती है. हमने कभी भी समाज को वैज्ञानिक चेतना से लैश करने की तरफ सार्थक प्रयास नहीं किए. ऐसे में आस्था के नाम पर चल रहे मठ, अनैतिक गतिविधियों का केंद्र बन गए हैं.”