विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ज्ल्द ही संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करेंगी. इसमें वह आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई, जलवायु परिवर्तन और सुरक्षा परिषद में सुधारों जैसे मुद्दे उठा सकती हैं. अपने भाषण से वह टेररिस्तान पाकिस्तान को भी जवाब देंगी.

आपको बता दें कि संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने पहले संबोधन में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहिद खाकान अब्बासी ने भारत पर उनके देश के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों में लिप्त होने का आरोप लगाया था. संयुक्त राष्ट्र महासभा में सुषमा (65 साल) का यह लगातार दूसरा संबोधन होगा. ऐसा माना जा रहा है कि पिछले वर्ष की तरह इस बार भी वह भाषण हिंदी में ही देंगी.

पाकिस्तान को घेरने की तैयारी

भाषण से पहले ही सुषमा स्वराज ने पाकिस्तान को सबक सिखाने की तैयारी शुरू कर दी है. शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की सालाना बैठक के इतर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने सार्क देशों के प्रतिनिधियों के साथ मुलाकात की. शनिवार को दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क ) के देशों ने आतंकवाद के मुद्दे पर भारत के साथ एकजुटता दिखाई है और ऐसा लगता है कि इस साल भी सार्क की बैठक नहीं होगी. इससे पाकिस्तान को करारा झटका लग सकता है. आपको बता दें मंत्रिस्तरीय बातचीत में आतंकवाद का मुद्दा छाया रहा है. एक सीनियर डिप्लोमेट्स ने आजतक को बताया कि पाकिस्तान ने इस बैठक में सार्क सम्मेलन की मेजबानी का मुद्दा उठाया. पाकिस्तान ने बैठक में कहा कि वह जल्द ही सार्क देशों की बैठक आयोजित करना चाहता है. इस बैठक में सभी लोगों ने इस बात पर सहमति जताई कि जब तक स्थिति नहीं सुधरती है, पाकिस्तान को सार्क बैठक की मेजबानी नहीं करनी चाहिए.

बता दें कि 2016 में पाकिस्तान को सार्क देशों की मेजबानी करनी थी. लेकिन, भारत के समिट में भाग न लेने के फैसले के बाद बांग्लादेश, अफगानिस्तान ने पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद को समर्थन देने का मुद्दा उठाते हुए सार्क बैठक से खुद को अलग कर लिया था.

आतंकवाद पर रखेंगी भारत का पक्ष

सुषमा स्वराज गत रविवार को न्यूयॉर्क पहुंची थीं और उन्होंने शुक्रवार को अधिकांश समय अपने भाषण को अंतिम रूप देने में बिताया. अन्य बहुपक्षीय मंचों और द्विपक्षीय बैठकों में उनकी टिप्पणियों को संकेतक माना जाए तो यह अनुमान लगाया जा सकता है कि उनके आने वाले संबोधन में आतंक के खिलाफ लड़ाई, यूएनएससी में सुधार, जलवायु परिवर्तन और 21वीं सदी में भारत की भूमिका तथा जिम्मेदारियां आदि विषय शामिल हो सकते हैं. शुक्रवार को उन्होंने केवल एक ही द्विपक्षीय बैठक की. अमेरिकी विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन के साथ द्विपक्षीय बैठक में उन्होंने आतंकवाद तथा एच-1बी का मुद्दा उठाया. उन्होंने अमेरिका-भारत के बीच राजनीतिक तथा आर्थिक साझेदारी को मजबूत बनाने पर चर्चा की.

अब तक विदेश मंत्री ने अन्य देशों के अपने समकक्षों के साथ 27 द्विपक्षीय बैठकें, 12 बहुपक्षीय बैठकें और दो त्रिपक्षीय बैठकें कीं. हालांकि अधिकारी इस बारे में कुछ भी बताने को तैयार नहीं हैं कि उनके भाषण की विषय वस्तु क्या होगी। वैसे माना जा रहा है कि उनके भाषण में नए भारत की झलक दिख सकती है.