बेवफा कब होती हैं इस मुल्क की सोनम गुप्ताएं !

नोट बंदी के दिनों में जब देश की सरकार दम भर रही है कि लो जी आ गए अच्छे दिन। नोटबंदी के इन दिनों में जब विपक्ष गला फाड़ के चिल्ला रहा है कि देखिए आपातकाल इसी को कहते हैं। नोटबंदी के इन दिनों में जब मोदी भक्तों और राष्ट्रभक्तों में फर्क करना मुश्किल है। जब देशभक्ति दिखाने का सुनहरा अवसर, बैंक की कतारों में मुस्काते हुए लग जाना है। एक सीधी सादी बात जो सोशल मीडिया पर राष्ट्रीय चिंतन बनकर उभरी। बात, बस इतनी सी कि सोनम गुप्ता की बेवफाई, एक दिल जले शख्स को रास ना आई। और टूटे दिल की कराह इस अंदाज में करेंसी पर आई कि जैसे कोई आसमान पर लिख दे अपनी मोहब्बत का नाम। एक तरफा दीवानगी की एक इबारत लिख दी गई दस के नोट पर, कि सोनम गुप्ता बेवफा है। सोनम गुप्ता बेवफा है या नहीं है? है तो सामने आए? ये आवाजें उठीं। फिर बात यहां तक पहुंची की सोनम गुप्ता की बेवफाई नारी अपमान का इश्तेहार ना बन जाए कहीं, तो स्त्री की अस्मिता से जोड़कर सोशल मीडिया पर चले तर्क और दलीलें। कुछ आवाजें यूं भी उठी, बंद करो सोनम गुप्ता का मजाक। आम आदमी पार्टी की तर्ज पर कहा जाने लगा मैं भी सोनम गुप्ता है और वो भी सोनम गुप्ता । तो भाई इमेजनरी सोनम गुप्ता की इमेजनरी कहानी सुन लीजिए। और ये हकीकत भी जान लीजिए कि सोनम गुप्ता बेवफा नहीं है। 
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–इस मुल्क में सोनम गुप्ता कब बेवफा होती है भला। वो तो आखिरी फेरे तक इंतजार करती है कि दिलवाला आएगा, अप टू डेट दुल्हनियां को लेकर जाएगा। लेकिन कोई नहीं आता। लिहाजा वो भी नहीं आया। और फिर सोनम के बिनाइश्क ब्याह के बाद, चढे तीन पैग और , जैसे दिल छेड़ देता है ये तराना कि आपकी याद आती रही…रात भर, चश्में नम जगमगाती रही…बस यही वक्त था। कि जब उसने देश की धरोहरों, पत्थर पेड़ों की तरह उस कागज पर लिख दिया सोनम गुप्ता का नाम, जो सिर्फ कागज नहीं, इस देश की इकनॉमी की ड्राइविंग फोर्स है। वो दस का नोट था। 
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हमारे मुल्क में इश्क का ये क्लाईमेक्स पहला नहीं है. कितनी सोनमें, गुप्ता हुईं। कहने का मतलब अगले की नजर में बेवफा हुईं। लेकिन ये इकतरफा इश्क की दास्तानें हैं। हमारे देश में पत्थरों, पेड़ों और कालान्तर में करेंसी पर इस इबारत को उकेरे जाने की लंबी परंपरा रही है। 
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तेरा मेरा साथ रहे…,धूप हो छाया हो दिन हो कि रात रहे, उसने प्रेम के इस प्रेरणादायी गीत को अपने जीवन का सार बना लिया था । पर घर व्दार मान बैठी थी जिसे, उस शख्स को जरुर अंदाजा नहीं था कि दिल्लगी दिल की लगी हो जाएगी। लेकिन क्या करें हिन्दुस्तानी की सोनम गुप्ताओं की दिक्कत यही है कि वैसे भले हंसी ठिठौली करती रहें। लेकिन प्यार के मामले में सोनम गुप्ताएं सीरियस होकर ही कदम बढाती हैं। इस देश की सोनम गुप्ताओं का डेट पर जाने से पहले पहला सवाल ही ये होता है कि शादी करोगे तो आगे बढें. वरना तुम अपनी दुनिया में खुश और हम अपनी दुनिया में। 
——————                             sonam 1ये हकीकत है कि सोनम गुप्ता अपनी दुनिया में भी खुश नहीं है। गुप्ता जी दुकान से दस बजे तक घर आते हैं। और भोजनादि से निवृत्त हो जाने के बाद, इन दिनों तो फिर नोटों के हिसाब में जुट जाते हैं। सोनम खुश नहीं है, क्योंकि ब्याह के तीन चार महीने बाद ही गुप्ता जी की नजरों में सोनम पांच सौ के नोट की गड्डी से ज्यादा कुछ नहीं रही। जिस प्यार से वो, सौ सौ के नोटों की बदली हुई गड्डी को देखते हैं, अपने लिए गुप्ता जी की आंखों में वो प्यार देखने के लिए तरस गई थी सोनम। सोनम कह पाती तो कह देती शायद तुम्हारी तरह इश्क को रुसवा नहीं करती पर तुम्हारी बेवफाई की कीमत तो मैने चुकाई है। 
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आज जब पांच के सिक्के से लेकर डॉलर तक सोनम की बेवफाई को सबूत बनाकर पेश किया जा रहा है। सोनम खामोश है। वो ना जंतर मंतर पर आएगी। ना प्रेस क्लब पर अचानक मीडिया को बुलाकर कोई खुलासा करेगी। क्योंकि उसे वो हर एक बात याद है। जो सोनम गुप्ता से बेवफाई करने वाले, हरजाई ने कही थी। उसने जो गाया, कर दिखाया, वो गाता था, आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे हर जुबान पर सबको मालूम है और सबको खबर हो गई। सिवाए गुप्ता जी के। क्योंकि गुप्ता जी को अपने गल्ले से फुर्सत नहीं है। वैसे वैवाहिक जीवन में पति अथवा पत्नि के हर मामले से बेखबर रहने की ये स्थितियां सर्वोत्तम मानी गई हैं। शास्त्रों में इसे ही गृह युध्द के टल जाने की संज्ञा दी गई है। 
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सोनम गुप्ता जानती है कि नोटों पर सोनम गुप्ता की बेवफाई, रुसवाई की जो पूरी कहानी लिखी जा रही है, इस बेवफाई में उस बेदर्द का दर्द भी छिपा है। वो जो चुपके से कह जाता था, मेरे प्यार की उम्र हो इतनी सोनम, पांच के सिक्के से शुरु दो हजार के नोट पे खत्म। 
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सोनम चार लफ्जों की दिल की कहानी का मजमून जान गई है। जान गई है कि ये तड़प है उसकी। ये जो नोट दर नोट लिखे जा रहा है, सोनम गुप्ता बेवफा है। सच पूछिए ये उस हरजाई की मोहब्बत है। वफा की किरचें हैं।

मोदी युग का नोट बंदी काल सोनम गुप्ता के लिए भी याद किया जाएगा

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आलेख- शैफाली पांडे

(शैफाली पांडे पत्रकारिता और रचनाजगत में एक सुपरिचित नाम है.)