Kamlanath Hero Imageक्या कमलनाथ को मप्र. की कमान से ही सुधरेंगे कांग्रेस के हालात…………..

  • नीरज ओमप्रकाश श्रीवास्तव की रपट

मध्यप्रदेश में २०१८ में होंने वाले चुनावों के लिये कमलनाथ को नाथ बनाया तो क्या कांग्रेस के प्रदर्शन में कोई गुणात्मक सुधार संभव है. इस सवाल को वर्तमान राजनीतिक परिपेक्ष्य में अब बहुत गंभीरता से लिया जाने लगा है. क्योंकि मध्यप्रदेश में कांग्रेस की भीतरी राजनीति के गुटों में बंटा होने के वालजूद कांग्रेस के लिये सकारात्मक संभावनायें तलाशने वाले राजनीतिक विश्लेषकों की राय है कि पन्द्रह साल मध्यप्रदेश की सत्ता पर काबिज भारतीय जनता पार्टी और बारह सालों से लागातार मुख्यमंत्री पद पर काबिज शिवराज सिंह के विरूद्ध आम जनता में वातावरण बना है. लेकिन इसे मध्यप्रदेश में कांग्रेस का समग्र दुर्भाग्य समझा जा सकता है कि संगठन की आपसी फूट के चलते भाजपा और मुख्यमंत्री शिवराज के विरूद्ध यथोचित मुद्दों की मौजूदगी के वावजूद कांग्रेस मुखर रूप से सामने नहीं आ सकी.

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ऐसे समय में जबकि भूमिस्तर पर कांग्रेस का संगठन परस्पर मतभेदों के वावजूद भाजपा की नीतियों से परेशान होकर एकजुट होना भी चाहता है तो गुटीय और क्षेत्रीय क्षत्रपों की बजाय मध्यप्रदेश में एक अनुभवी और सक्षम नेता की जरूरत को नकारा नही जा सकता है. ऐसे में मध्यप्रदेश में कांग्रेस में कमलनाथ ही ऐसे कांग्रेस नेता हैं जो कांग्रेस कार्यकर्ताओं को विजय का विश्वास और भाजपा के विरूद्ध लड.ने का संबल दे सकते है. कांग्रेस की राजनीति में बीते सालों में उनका गुट निरपेक्ष बना रहना इस आडे. समय में कांग्रेस को मध्यप्रदेश में जीवनदायिनी संजीवनी साबित हो सकता है.

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कमलनाथ को मध्यप्रदेश का नाथ बनानें के तर्क से पहले हम उन बिंदुओं पर चर्चा करते हैं जो मध्यप्रदेश में भाजपा की सरकार के विरूद्ध कांग्रेस की ओर से नेतृत्व करने के लिये चयनित नेता बनने के लिये जरूरी हो सकते हैं. अभी तळक जो नाम हैं उनमें ग्वालियर अंचल से ज्योतिरादित्य सिंधिया, पश्चिम से अरूण यादव कांतिलाल भूरिया, रेवांचल से नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह, मध्यप्रांत से सुरेश पचौरी , जयवर्धन सिंह से शुरू करें तो मुख्यमंत्री की आसंदी तक पहुंचने के योग्य बहुत सारे नाम सूची में हो सकते हैं. लेकिन संसदीय कार्य का अनुभव, प्रशासनिक क्षमताओं की उपलब्धिता और राज्यभर में ठोस जनाधार वाले नेता के रूप श्री कमलनाथ को इस चुनाव में भूल जाना कांग्रेस के लिये भारी चूक के रूप में जानी जायेगी.

BBBकांग्रेस की सिरमौर सोनिया गांधी और स्वर्णिम भविष्य के सूत्रधार राहुल गांधी नें गुजरात में कांग्रेस के लिये लहर बनाई है उससे गुजरात चुनावों के परिणामों से परे समूचे देश में कांग्रेस के वफादारों के बीच उत्साहवर्धक स्थिति देखने को मिल रही है. यदि ऐसे में श्री कमलनाथ को केन्द्र में रखकर कांग्रेसजन अपनी प्रतिबद्धता पार्टी के प्रति दिखा दें तो शिवराज सरकार का तख्ता पलटना तय हो सकेगा.

CCCराज्य की कांग्रेस राजनीति में श्री दिग्विजय सिंह आज भी सर्वाधिक प्रभावकारी नेता हैं. उन्हें दरकिनार कर मध्यप्रदेश कांग्रेस संगठन का कोई भी नेता बेहतरीन प्रदर्शन नहीं कर सकता. अपनी नर्मदा यात्रा से श्री दिग्विजय सिंह गहन जनसंपर्करत हैं. हालांकि बर्ष १९९२ में श्री कमलनाथ नें उनको मुख्यमंत्री बनाये जाने के दौरान बडे.भाई की भूमिका निबाही थी सो श्री दिग्विजय सिंह कांग्रेस के दीर्घकालीन हितों के नजरिये श्री कमलनाथ को मध्यप्रदेश में नाथ की भूमिका में आगे आने दें तो राज्य में कांग्रेस की आधी समस्या हल ही समझिये. उधर श्री अरूण यादव, कांतिलाल भूरिया और सुरेश पचौरी के लिये भी कमलनाथ जी के मार्गदर्शन में काम करना असहज नहीं होगा.

DDDश्री ज्योतिरादित्य सिंधिया उत्तरी मध्यप्रदेश के तीन-पांच जिलों में ही कांग्रेस का मजबूती से परचम लहराने में यदि श्री कमलनाथ को मजबूती दे दे , तो समूचे मध्यप्रदेश में कांग्रेस श्री कमलनाथ को अपना नाथ बनानें में देरी नहीं करेगी. बीते पन्द्रह सालों में कांग्रेस का सड.क पर परचम लहराने वाले सक्रिय कार्यकर्ताओं को निर्गुट कार्यकर्ताओं को पार्टी टिकट देकर प्रदेश में अच्छा प्रदर्शन कर सकती है.हालांकि श्री सिंधिया मानसिक रूप से अपने-आप को अगला मुख्यमंत्री मान बैठे हैं .यही हाल उनके समर्थकों का है कि वे समूचे प्रदेश के हालातों को दरकिनार कर सिंधिया को हरहाल में मुख्यमंत्री देखना चाहते हैं जो वर्तमान राजनीतिक हालात में नामुमकिन है. वैसे श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया श्री कमलनाथ से बहुत कनिष्ठ हैं किन्तु कांग्रेस संगठन में वरिष्ठता कनिष्ठता की गिनती गौड. है और वही वजह संगठन को गर्त में खींच रही है. संगठन के दीर्घहितों के लिये श्री सिंधिया आगे बढ.कर श्री कमलनाथ के साथ आयें तो बात बन सकती है.mmskamal_antonyaicc20141701_350_630श्री कमलनाथ की मध्यप्रदेश में प्रासंगिकता बर्षों से स्थिर रही है वे बर्ष १९८० के दशक से ही गांधी परिवार के विश्वस्तों में से हैं. इंदिरा जी , राजीव जी और सोनिया गांधी का उनपर सहज विश्वास रहा है. अनेक बर्षों तक केन्द्र सरकार के महत्वपूर्ण महकमों में रहते हुए भी उनकी छवि निर्विवाद रूप से स्वच्छ है. वे शीर्ष स्तर पर कांग्रेस संगठन की गतिविधियों के संचालकों में से रहे हैं.

EEEमध्यप्रदेश में उनकी छवि छिंदवाडा. में कांग्रेस के अविजेय योद्धा के रूप में रही है. छिंदवाडा. और समीपस्थ जिलों में उनके द्वारा किये विकास के माडल को उनके विरोधी भी सराहते रहे हैं.संसदीय मर्यादाओं का पालन करते हुए उन्होंनें सदैव लोकतांत्रिक मर्यादाओं में आस्था रखी है. छिंदवाडा. के अलावा देश भर में फैले बडे-बडे. राजमार्ग उनकी मेहनत का नतीजा हैं. उनके विकास माडल को मध्यप्रदेश में बेहतर ढंग से प्रस्तुत कर कांग्रेस जनता के बीच जाये तो परिणाम हर हालात में सबसे बेहतर होंगे. इस सबसे बढकर एक बात यह भी है कि वे मध्यप्रदेश के आमजनों के सहज मान्य नेता हैं.

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बताया जाता है कि छिंदवाडा.और दिल्ली में भी वे अपने कार्यकर्ताओं और कांग्रेसजनों को बहुत मान देते रहे हैं. श्री कमलनाथ के राजनीतिक कैरियर के आधार पर उन्हें सर्वहारा वर्ग का नेता माना जा सकता है. इसलिये मध्य प्रदेश के कांग्रेस नेताओं को पार्टी के दीर्घकालीन हितों के चलते श्री कमलनाथ का राज्य की जनता का नाथ बनानें में देर नहीं करनी चाहिये.

201710262022238178_kamalnath-attacked-on-shivraj-singh-by-tweet_SECVPFइधर मध्यप्रदेश में हालांकि भारतीय जनता पार्टी का संगठनात्मक ढांचा बहुत मजबूत है.लेकिन श्री शिवराज सिंह को सिर्फ इतनी सी चिंता है कि मुकाबला बस श्री कमलनाथ से न हो बाकी सबसे वे गाहे-बगाहे निपट चुके हैं. बीते दो तीन बर्षों में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की लोकप्रियता में थोडी. कमी आई है. उनके भाषण उबाऊ लगने लगे है. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की प्रशासनिक क्षमताओं में कमी के चलते राज्यभर में अराजकता फैलने के संकेत मिलने लगे हैं. श्री शिवराज सिंह के माई का लाल जैसे बयानों को राज्यभर के युवाओं ने चुनौती पूर्ण रूप से लिया है. अनेक घोटालों की आंच से घिरे मुख्यमंत्री शिवराज का विरोध संगठन के स्तर पर भी बढ रहा है. लेकिन इसे कांग्रेस का दुर्भाग्य ही माना जायेगा कि समय रहते भाजपा सरकार और उसके मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के विरूद्ध जन्में आक्रोश को राजनीतिक स्तर पर भुनाने के लिये कांग्रेस की ओर से कोई सर्वमान्य नाथ नहीं है. इशारा साफ है कि मध्यप्रदेश में अनाथ हो रही कांग्रेस को बचाने नाथ का सहारा जरूरी है…..