Pic 1
सभी चित्रों का छायांकन- प्रताप सिंह.

नर्मदा परिक्रमा यात्रा में परवान चढ. रहा है राजा दिग्विजय और अमृता रानी का आध्यात्मिक हनीमून

( बडोदरा से लौटकर नीरज ओमप्रकाश श्रीवास्तव की रपट )

सदी के सत्रहवें साल के सितंबर महीने की आखिरी तारीख से शुरू हुई श्री दिग्विजय सिंह और रानी अमृता की नर्मदा परिक्रमा यात्रा ढाई महीने से अनवरत है. इस यात्रा के विशुद्ध धार्मिक होने का दावा अब तक तो सच ही साबित हुआ है. प्रतिदिन पन्द्रह से पच्चीस किलोमीटर तक नर्मदा नदी के किनारे – किनारे पैदल होने वाली इस यात्रा के दौरान रास्ते में आने वाले लगभग सभी प्रमुख छोटे-बडे मंदिरों में माथा टेकता हुआ राजा-रानी  का यह जोडा. जैसे अपने आध्यात्मिक हनीमून पर निकला है और तलाश कर लेना चाहता है इस बहुमूल्य जीवन के वास्तविक आनंद और ईश्वर के प्रति अपने स्नेह की अभिव्यक्ति का सहज मार्ग.‌..!   कहा जा सकता है कि नर्मदा परिक्रमा यात्रा के जरिये परवान चढ. रहा है राजा दिग्विजय के संग अमृता रानी का आध्यात्मिक हनीमून.

FB_IMG_1512479776788
सभी चित्रों का छायांकन- प्रतापसिंह.

राजहठ के चलते श्री दिग्विजय सिंह नें अपने भीतर छिपे धर्म के प्रति श्रद्धावनत व्यक्ति की धर्म और ज्ञान पिपासा शांत करने के लिये श्री नर्मदा परिक्रमा जैसी दुर्गम यात्रा को पैदल करने का संकल्प आरंभ किया तो देशभर में उनके प्रति सकारात्मक और नकारात्मक दोनों प्रकार के समाचारों में रूचि रखने वाले वाले जागरूक लोग हैरत में पड. गये. कतिपय लोग इसे बीते महीनों में संपन्न मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा की गई यात्रा का प्रत्युत्तर मान बैठे. राजनीति से जुडी. अनेक बडी हस्तियों के यात्रा में बीच – बीच में पहुंचने से अखबारों की सुर्खियां और समीक्षायें श्री दिग्विजय सिंह के अतीत और भविष्य की राजनीति की व्याख्या करनें तक केन्द्रित रहीं. परन्तु इन सुर्खियों और समीक्षाओं में उस आध्यात्मिक सुख की कहीं कोई चर्चा नहीं रही जो पैदल श्री नर्मदा परिक्रमा के दौरान हरेक परिक्रमावासी ही महसूस कर सकता है. श्री दिग्विजय- अमृता ने इस यात्रा में अब तक लगभग १४०० किलोमीटर का फासला पैदल ही तय किया है. अरब सागर का भारी तूफान ओखी  आशंकाओं के बाबजूद इस दिग्विजयी काफिले के हौसले को रत्ती भर भी डिगा न सका. अपने रास्ते में दिखने वाले हर राहगीर से नर्मदे हर – नर्मदे हर कहते हुए दिग्विजय सिंह अपनी रानी अमृता के संग नर्मदा प्रेम में डूबे अपने आध्यात्मिक हनीमून का आनंद लेते हुए ही दिखाई दिये.

IMG_20171210_110733228
सभी चित्रों का छायांकन- प्रतापसिंह .

  रानी श्रीमती अमृता के लिये इतना लम्बा पैदल सफर थकाऊ और ऊबाऊ कतई न रहा होगा क्योंकि उनके अतीत से जुडी.और उनके भीतर छिपी टी. व्ही. एंकर और पत्रकार अमृता अपने हमसफर राजा की धार्मिक यात्रा में खुद को पूरा सराबोर कर लिया. वे हरेक मंदिर और हरेक पूजा में ह्रदय से राजा की सहधर्मिणी होने का कर्तव्य तो निबाह ही रही थीं, लेकिन श्री नर्मदा परिक्रमा यात्रा के मार्ग में बिखरे आध्यात्मिक ज्ञान और रंगबिरंगे संसार की तस्वीरें लेने से वे खुद को रोक न सकीं हैं . फोटोग्राफी का शौक राजा- रानी दोनों को बराबर से है इसलिये  ठहरने की जगह से लेकर मार्ग में आने वाली थोडी. सी विचित्रता को भी अपनें कैमरे के जरिये चित्रित कर लेना राजा-रानी के इस आध्यात्मिक हनीमून का हिस्सा बन गया. संभव है कि वे इन विचित्र , चित्रों और मार्ग से बीने अनुभवों को किसी किताब के जरिये बयां भी करें लेकिन हठी राजा नें श्री नर्मदा परिक्रमा के संकल्प को पूरा करने में जो मानसिक मजबूती दिखाई है वह उनके संकल्पों की दृढ.ता ही व्यक्त करती है.

 श्री नर्मदा परिक्रमा यात्रा में श्री दिग्विजय सिंह के साथ स्थायी रूप से  नियमित यात्रा  करने वाले परिक्रमावासी संख्या में ढाई सौ के लगभग हैं. इन ढाई सौ लोगों में लगभग पचास का संख्या के आसपास वे लोग हैं जो अपने निजी संकल्पों से यात्रा करने निकले थे और दिगविजयी काफिले में शामिल हो गये. इन पचास लोगों मे मां नर्मदा के तट पर रहने वाले साधु- संत और कुछेक गृहस्थ भी हैं. इन सबनें राजा दिग्विजय सिंह के मधुर व्यवहार के कारण काफिले  के साथ रहना मुनासिब समझा. शेष परिक्रमावासियों में श्री दिग्विजय सिंह के प्रति आदरभाव रखने वाले वे लोग शामिल हैं जो मध्यप्रदेश के विभिन्न शहरों से ताल्लुक रखते हैं. इनमें भी मध्यप्रदेश के गुना जिले के राघौगढ. जो कि श्री दिग्विजय सिंह का गृहक्षेत्र है उनकी भी बडी. संख्या है. गुना और राजगढ. जिले के बहुत सारे लोग नियमित रूप से यात्रा में साथ चल रहे हैं. यात्रा के दौरान श्री दिग्विजय सिंह के साथ उनके अनुचर और सहायकों की एक बडी. टोली हरदम हमकदम और व्यवस्था में बराबर की भागीदार भी है. परिक्रमा के दौरान सहस्त्रों आगंतुकों का आना जाना और सिंह दम्पत्ति से मिलने- जुलने का दौर बना रहता है.

FB_IMG_1513088069609
श्री रामेश्वर नीखरा पू.संसद सदस्य लोकसभा होशंगाबाद म.प्र.

श्री नर्मदा परिक्रमा पदयात्रा के पहले ही दिन से होशंगाबाद के पूर्व सांसद श्री रामेश्वर नीखरा भी समर्पित भाव से श्री दिग्विजय सिंह के हमकदम हैं. श्री नीखरा के पैरों के दो बार गंभीर आपरेशन् हो चुके हैं लेकिन अपनी मानसिक शक्ति और सामर्थ्य के बूते वे इस दिग्विजयी महापदयात्रा में पुष्य में बराबर के भागीदार बन चुके हैं. माना जा सकता है कि श्री नीखरा का निरंतर मौजूदगी से निश्चय ही दिग्गी राजा को भी अच्छा ही लग रहा है , वे जरा सा भी आगे पीछे हो जाने पर पूछने लगते हैं कि नीखरा जी कहां हैं.  इसी प्रकार राजगढ. के पूर्व संसद सदस्य श्री नारायण सिंह सोंधिया भी इस यात्रा में आरंभ से ही है. अपनें राजनीतिक साथी श्री रामेश्वर नीखरा का साथ श्री दिग्विजय सिंह को भी बहुत रास आ रहा है. श्री नीखरा के साथ पुराने रिश्तों की बजह से उनकी आपसी चर्चा गंभीर बिषयों के अलावा हल्की फुल्की मजेदार बातों पर भी हो जाती है. पदयात्रा के दौरान श्री दिग्विजय सिंह अपने साथ चलने वाले परिक्रमावासियों से कभी-कभी खूब गपशप करते हैं तो कभी- कभी गंभीर वार्तालाप करते हैं. अपनें चिरपरिचित अंदाज में ठहाका लगाकर खूब हंसते हैं तो हमकदम लोगों को भी खूब हंसनें हंसाने का मौका मिल जाता है. उनकी पदयात्रा में कई पुराने तो कई नये परिचित शामिल होते हैं जो अपनी शैली में श्री सिंह को लुभाने और अपनी ओर आकर्षित करने में कोई कसर नहीं छोड.ते हैं. अपनी इस आध्यातिमिक पदयात्रा के दौरान वे बहुत गंभीरता छोटे-बडे. और मार्ग में आने वाले सभी मंदिरों में पूरे सपत्नीक भक्तिभाव से दर्शन व पूजा-पाठ भी करते हैं. कई बार उनकी पत्नी अमृता विभिन्न मंदिरों के बारे में बहुत सारी जानकारियां भी पूछती चलती हैं. मार्ग में श्रीमद् भगवतकथा श्रवण का लाभ भी लिया जाता है. पंडित घनश्याम तिवारी पदयात्रा के दौरान उन्हें महाभारत के अनेक प्रसंग सुनाते रहे हैं जिसे वे और श्रीमती अमृता पूरे भक्तिभाव से सुनते भी हैं. ऐसे में श्रीमती अमृता कई बार एक पत्रकार की भांति प्रतिप्रश्न कर कथा के दौरान अपनी शंकाओं का समाधान भी करते हे.

IMG_20171210_105217289
कई बार अपने जूतों के तस्में खुल जाने की वजह से रूककर बाँधनें लगती हैं अमृता जी
Childs
सभी चित्रों का छायांकन – प्रताप सिंह

रानी अमृता स्वहाव से जितनी जिज्ञासु हैं उससे भी कहीं सरल , लेकिन वे विभिन्न बिषयों पर बहुत गंभीरता से सोचती हैं. पदयात्रा के दौरान अमृता जी कई बार ठहर जाती हैं और जंगल और रास्ते से एकत्र की गई चीजों के बारे में जानना चाहती हैं. श्री दिग्विजय सिंह बहुत धैर्य से उनकी बात सुनते हैं और उन्हें सामान्य जनजीवन से जुडी चीजों के बारे में सहज रूप से बताते भी हैं. रानी श्रीमती अमृता सिंह रास्ते में कामकाजी महिलाओं , खेतिहर मजदूरों और बच्चों से बहुत सारी बातें जानने –बूझने का यत्न करती हैं और फिर से पदयात्रा करते हुए अपने अनुभवों को दिग्गी राजा के साथ-साथ परिक्रमावासियों के साथ साझा करती हैं. कभी – कभी वे बहुत सहज भाव से खिलखिला उठती हैं तो कई बार अपने जूतों के तस्में खुल जाने की वजह से रूककर बाँधनें लगती हैं. इधर दिग्गी राजा भी अपने मार्ग में छोटे बच्चों से बहुत ही प्यार से पेश आते हैं कई बार वे उन्हें अपने आगोश में भी ले लेते हैं और अपने साथ फोटो भी लेते हैं.

FB_IMG_1513156192009

FB_IMG_1513156020797
सभी चित्रों का छायांकन – प्रताप सिंह

इस पदयात्रा के दौरान सुबह कोई पांच बजे के आसपास राजा दिग्विजय सिंह बिना किसी के जगाये खुद ही उठ जाते हैं. वे लगभग आधा घन्टा योगा करते हैं. फिर कभी- कभी वे बाहर घूमकर फोटोग्राफी भी कर लेते हैं. इस दौरान वे अपने साथ चल रहे साधु- संतों और परिक्रमावासियों का हालचाल भी जान लेते हैं. पदयात्रा के दौरान अपने साथ चलने वाले लगभग हरेक व्यकित की पूरी खबर रखते हैं. उनके दल में एक फिजियोथेरेपिस्ट डा. राजेश भी हैं जो श्री सिंह का ख्याल रखते हैं जबकि एक फिजिशियन डा. साहिब अली दवा का थैला साथ रखते हैं जो सभी परिक्रमावासियों के भी काम आता है. सुबह के समय ही रानी अमृता भी उठ जाती हैं तैयार होने के बाद वे अखबार पढना चाहती हैं लेकिन अखबार न मिलने पर वे अपने सेल फोन पर खबरे और सोशल मीडिया में चलन वाली तमाम बातों पर निगाह रखती है. श्री अमृता उस समय बहुत उबाऊ महसूस करती हैं जब अखबार न मिलने के साथ- साथ सेलफोन और डाटा का नेटवर्क नहीं मिलता. इधर आगन्तुकों और भेंटकर्ताओं का पहुंचना अलसुबह से ही शुरू हो जाता है. लेकिन सिंह दम्पति लगभग साढे नौ बजे पूरे तरह तैयार होकर आरती करने के उपरान्त अपने अगले गंतव्य की ओर चल पड.ते है. यात्रा के दौरान सबसे आगे नर्मदा यात्रा का ध्वज लेकर चल रहे हैं नरसिंहगढ. के लोकेश कुमार सेन जो वहां के सांसद प्रतिनिधि भी हैं.

IMG_20171210_110802759 (1)
परिक्रमावासियों के लिये जलपान व्यवस्था में भूपेन्द्र सिंह रघुवंशी.बरेली

परिक्रमा यात्रा आरंभ होते ही भगवत कथा और धार्मिक चर्चाये आरंभ हो जाती है. बीच-बीच में नये परिक्रमावासियों का आकर मिलना और पदयात्रा से जुड. जाने का सिलसिला जारी रहता है. प्रत्येक पांच किलोमीटर की पैदल यात्रा के बाद जलपान और चाय की व्यवस्था मिलती है जो या तो श्री दिग्विजय सिंह के किसी निकटतम व्यक्ति द्वारा उपलब्ध कराई जाती है अन्यथा परिक्रमा के दिग्विजयी काफिले में आगे पीछे चलने वाली भोजन व्यवस्था के लिये तैयार ट्रक्स और मारूति वाँन में मौजूद खानसामें चायपान की व्यवस्था मुहैया कराते हैं.बताया गया कि होशंगाबाद के श्री अशोक दुबे नें आरंभ से अब तक भोजन- जलपान व्यवस्था का दायित्व स्वैच्छिक रूप से संभालकर न केवल दिग्गी राजा वल्कि समस्त परिक्रमा वासियों को बहुत सहूलियत दी हैं. रायसेन जिले के बरेली से पहुँचे एक युवा नेता भूपेन्द्र सिंह रघुवंशी पदयात्रा के साथ-साथ भोजन-जलपान व्यवस्था में कार्य में सहभागिता करते नजर आये. रास्ते में जहां दोपहर भोजन के लिये रूकते हैं वहां श्री दिग्विजय- अमृता सिंह भी सामान्य परिक्रमावासी की भांति कुछ देर विश्राम के लिये रूते हैं. फिर  दिन की यात्रा का दूसरा चरण आरंभ होता है जो बीच में जलपान के लिये रूकता हुआ उस दिन के गंतव्य तक पहुंचता है. 

श्री नर्मदा परिक्रमा पदयात्रा के दिग्विजयी काफिले में स्थाई रूप से चौदह चार पहिया वाहन शामिल हैं जो श्री सिंह के निजी अनुचरों और पदयात्रा के दौरान विभिन्न सेवाओं , राजा-रानी की सुरक्षा में तैनात कर्मियों  , जनसंपर्क और फोटोग्राफी टीम सहित अन्य सहायकों के दल के लिये है. इसके अलावा स्थानीय पुलिस प्रशासन द्वारा उपलब्ध करायी गई सुरक्षा टीम भी लगातार साथ ही बनी रहती है.एक ट्रेक्टर सुविधा के लिये चलित शौचालय लेकर चल रहा है ताकि मुख्य परिक्रमावासियों को कहीं असुविधा न हो. दो छोटे मिनी ट्रक टेन्ट आदि सामग्री लेकर गंतव्य पर पहले से ही पहुंच जाते हैं. स्थानीय स्तर पर श्री दिग्विजय सिंह के स्नेहीजन अनेक स्थानों पर पुष्पमालाओं जलपान और भोजन का प्रबंध कर गौरान्वित महसूस करते हैं.

सांयकाल जब परिक्रमावासी पैदल यात्रा कर अपने किसी गंतव्य पर पहुँचते है तो पूरे जोशोखरोश से मां नर्मदा की आरती की जाती है. प्रसाद वितरण और भोजन के बाद परिक्रमावासी अपने विश्राम के लिये नियत स्थान पर आराम कर अगले दिन की यात्रा के लिये तरोताजा होते हैं.

DSC_0264
सभी चित्रों का छायांकन- प्रतापसिंह .

FB_IMG_1512479762188पदयात्रा के दौरान श्री दिग्विजय-अमृता सिंह हरेक आगंतुक और भेंटकर्ता से पूरे जोश के साथ नर्मदे हर कहकर अभिवादन करते हैं.

मध्यप्रदेश के अलावा देशभर के विविध प्रांतों से श्री दिग्विजयसिंह के अनुयाईयों और स्नेहीजनों का तांता लगा रहता है. मध्यप्रदेश के उज्जैन से श्री महावीर प्रसाद वशिष्ठ की ओर से एक दल परिक्रमावासियों को परिक्रमा के दौरान जल सेवा उपलब्ध कराने में व्यस्त रहा जबकि भटेरा तहसील गाडरवार से श्री बृजेश लोधी, रीवा म‌.प्र. से युवा साथी दिवाकर दिवेदी , गजलकार नरेन्द्र सिंह सिवनी , श्री सुरेन्द्र ढिमोले,  गाडरवारा के अंचल कुमार तिवारी ,राजगढ जीरापुर से प्रकाश पुरोहित एवं सागर से श्री जैन बडोदरा जिले में यात्रा के दौरान श्री सिंह के सहयात्री बने.