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चारा घोटाले के एक मामले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव की किस्मत का फैसला शनिवार को होगा. रांची स्थिति सीबीआई के विशेष न्यायाधीश शिवपाल सिंह ने 23 दिसंबर को फैसले की तारीख तय की है.

लालू के अलावा इस मामले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री डॉक्टर जगन्नाथ मिश्र समेत 22 लोग अभियुक्त हैं.

न्यायाधीश ने सभी अभियुक्तों को कोर्ट में व्यक्तिगत तौर पर हाज़िर रहने को कहा है. लिहाजा शुक्रवार की शाम ही लालू प्रसाद रांची पहुंच गये थे.

लालू के साथ उनके बेटे बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, पूर्व मंत्री अब्दुल बारी सिद्दीकी समेत आरजेडी के कई नेता भी रांची आए हैं.

देवघर कोषागार से 84.54 लाख रुपये की अवैध निकासी से जुड़े इस मुकदमे (आरसी 64ए/96) में 15 दिसंबर को दोनों पक्षों की बहस पूरी हुई थी. इसी मामले में फैसला सुनाया जाना है.

 

लालू प्रसाद यादव

धारा 420 में सात साल की सज़ा का प्रावधान

रांची में लालू की पैरवी कर रहे अधिवक्ता प्रभात कुमार ने बीबीसी को बताया कि अभियुक्तों के ख़िलाफ़ मुख्य तौर पर भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 120 बी, 467, 470 के अलावा भ्रष्टाचार निवारण क़ानून की धाराएं भी लगाई गई हैं.

उन्होंने जानकारी दी कि इस मामले में दो पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव और डॉ जगन्नाथ मिश्र के अलावा पूर्व मंत्री डॉ आरके राणा, विद्यासागर निषाद, पूर्व सांसद जगदीश शर्मा और लोकलेखा समिति के पूर्व अध्यक्ष ध्रुव भगत सरीखे राजनेताओं के अलावा वरिष्ठ अधिकारी रहे बेक जुलियस, महेश प्रसाद, फूलचंद्र सिंह भी आरोपी हैं.

धारा 120 बी आपराधिक षड़यंत्र की ओर इशारा करती है. जबकि धारा 420 (बेइमानी, हेरा-फेरी छल या धोखा के रूप में किया जाने वाला अपराध) एक दंडनीय अपराध है. इसके तहत सात साल तक के कारावास की सजा का प्रावधान है.

लालू यादव के वकील प्रभात कुमार के मुताबिक इस मुकदमे से उन लोगों को बरी होने की उम्मीदें हैं.

 

डॉ जगन्नाथ मिश्र भी रांची पहुंचे

और तीन मामलों में घिरे हैं लालू

देवघर कोषागार से जुड़े इस मामले के अलावा चारा घोटाले के और तीन मामलों में लालू प्रसाद रांची स्थित सीबीआई की अलग-अलग कोर्ट में सुनवाई का सामना (ट्रायल फेस ) कर रहे हैं. इन मामलों को लेकर पिछले छह महीनों से लालू प्रसाद लगातार रांची आते रहे हैं. कई दफा उन्हें महीने में तीन बार तक आना पड़ा है.

चाईबासा कोषागार से अवैध निकासी से संबंधित आरसी 68 ए/96 में भी बहुत जल्दी फैसला आने के संकेत मिल रहे हैं. मतलब चारा घोटाले को लेकर लालू की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं.

सीबीआई की विशेष अदालत

पहले पांच साल की सज़ा

गौरतलब है कि तीन अक्तूबर 2013 को रांची स्थित सीबीआई के विशेष न्यायाधीश प्रवास कुमार सिंह की अदालत ने कांड संख्या आरसी 20 ए/96 चाईबासा कोषागार से कथित तौर पर 37.7 करोड़ की अवैध निकासी से जुड़े चारा घोटाले के एक मामले में पांच साल की सुनाई थी.

साथ ही अदालत ने 25 लाख का जुर्माना भी अदा करने को कहा था.

चाईबासा तब अविभाजित बिहार का हिस्सा था. हालांकि उस मामले में लालू प्रसाद फिलहाल जमानत पर हैं. लेकिन सज़ायाफ्ता होने के बाद वे संसद की सदस्यता गंवा बैठे और चुनाव लड़ने के भी अयोग्य हो गए.

जबकि इसी मामले में तब लालू प्रसाद के अलावा डॉ जगन्नाथ मिश्र को चार साल कारावास तथा 21 लाख रुपये जुर्माने की सज़ा सुनाई गई थी. चारा घोटाले के इस मामले में 44 अभियुक्तों को दोषी ठहराया गया था.

 

सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट का आदेश

मई 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआइ की अपील को मंजूर करने के साथ लालू प्रसाद के ख़िलाफ़ चारा घोटाले से संबंधित अलग-अलग मामलों में मुकदमा चलाने का आदेश दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने हाइकोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए कहा था कि प्रत्येक अपराध के लिए पृथक सुनवाई होनी चाहिए.

साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत को इन मामलों में नौ महीने में सुनवाई पूरी करने को कहा है.

नवंबर 2014 में झारखंड हाइकोर्ट ने लालू प्रसाद को राहत देते हुए कहा था कि एक मामले में दोषी ठहराए गए एक व्यक्ति के खिलाफ इन्ही धाराओं के तहत मिलते-जुलते अन्य मुकदमों में सुनवाई नहीं हो सकती.

 

सीबीआई की विशेष अदालतइमेज कॉपीरइटNIRAJ SINHA

कोल्हू के बैल

इस बीच शुक्रवार की शाम रांची पहुंचने पर लालू प्रसाद ने मीडिया से संक्षिप्त बातें की. उन्होंने सवालिया लहजे में पूछा कि क्या कोई चीफ मिनिस्टर ट्रेजरी (कोषागार) से रुपये निकाल सकता है? क्या कोई चीफ मिनिस्टर अपना खजाना लुटवाने के लिए षड्यंत्र कर सकता है? अब वो फैसला सुनने आए हैं. उन्हें तथा उनकी पूरी पार्टी को न्यायिक व्यवस्था पर पूरा भरोसा है.

लालू ने ये भी कहा कि सीबीआई का दुरुपयोग कर पहले अटल बिहारी वाजपेयी और फिर नरेंद्र मोदी के समय में उन्हें परेशान किया जा रहा है. उन्होंने कहा, “बीजेपी-एनडीए गठबंधन की सरकार पिछले 25-30 साल से हमको परेशान कर रही है, कोल्हू के बैल की तरह पेर रही है.”

लालू प्रसाद यादवमाथे पर चिंता की लकीरें

हालांकि उनके चेहरे पर चिंता की लकीरें भी साफ देखी जा रही थी.

उन्होंने कहा, “बेजीपी वाले हमारे बाल-बच्चे तक को परेशान करने में जुटे हैं. जनता ही उनका जवाब देगी. तेजस्वी और तेजप्रताप पर पूरी पार्टी को भरोसा है. ये भले ही छोटे हैं, लेकिन इनके राजनीतिक इरादे मजबूत हैं.”

एक सवाल के जवाब में लालू ने इस बात से इनकार किया कि किसी किस्म के फैसले से पार्टी पर कोई असर पड़ेगा.

इससे पहले रांची एयरपोर्ट से उनके बाहर निकलने पर आरजेडी के कार्यकर्ता समर्थन में जोरदार नारेबाजी की.