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घर के शेर भारतीय बल्लेबाज दक्षिण अफ्रीका में लगातार निराशाजनक प्रदर्शन कर रहे हैं. पहले केपटाउन और अब सेंचुरियन में टीम इंडिया की बल्लेबाजी को देखकर यही कहा जा सकता है कि विराट कोहली की टीम टेस्ट मैच खेलना भूल गई है. ये कोई आरोप नहीं है, बल्कि दक्षिण अफ्रीका में टीम इंडिया की बल्लेबाजी इसका सबूत है. इससे बेहतर तो ये होता कि भारतीय बल्लेबाज टी-20 की तरह ही इन टेस्ट मैचों को खेलते. ऐसा करने से वो बेहतर प्रदर्शन कर सकते थे.

ये आंकड़े गवाह हैं

दरअसल, दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेले गए दो टेस्ट मैंचों की चार पारियों में टीम इंडिया कुल 802 रन ही बना पाई. केपटाउन में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेले गए मैच की दो पारियों में भारतीय टीम कुल 344 रनों पर सिमट कर रह गई. भारतीय टीम का यही हाल सेंचुरियन में भी हुआ. यहां पर दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ दो पारियों में भारतीय टीम कुल 458 रन ही बना पाई. लिहाजा सेंचुरियन में भी भारतीय टीम को करारी हार का सामना करना पड़ा.

जीत समाने थी और बिखर गई टीम

यही नहीं, जब टीम को केपटाउन मैच जीतने के लिए 287 रनों का, और सेंचुरियन टेस्ट जीतने के लिए 208 रनों का टारगेट मिला तो पूरी टीम बिखर गई. जीत तो दूर केपटाउन में 135 रनों पर टीम सिमट गई तो सेंचुरियन में 151 रन पर सभी खिलाड़ी आउट हो गए.

बल्लेबाजों ने किया निराश

बुधवार को सेंचुरियन में दक्षिण अफ्रीका की आक्रामक गेंदबाजी के सामने भारतीय बल्लेबाजों ने घुटने टेक दिए. यहां खेले गए दूसरे टेस्ट में भारत को 135 रनों से शिकस्त का सामना करना पड़ा. इसके साथ ही विराट कोहली की टीम के लगातार नौ टेस्ट श्रृंखला जीतने के अभियान पर भी विराम लग गया. वहीं, पहले टेस्ट में 72 रन से जीत दर्ज करने वाली दक्षिण अफ्रीका ने तीन मैचों की श्रृंखला में 2-0 की विजयी बढ़त बना ली.

बुधवार को सेंचुरियन में दक्षिण अफ्रीका के 287 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए भारतीय टीम असमान उछाल वाली सुपर स्पोर्ट्स पार्क की पिच पर पांचवीं और अंतिम दिन दूसरी पारी में 50 .2 ओवर में 151 रन पर ढेर हो गई. टीम इंडिया की ओर से रोहित शर्मा ने सर्वाधिक 47 रन बनाए. फाफ डु प्लेसिस की अगुआई वाली दक्षिण अफ्रीकी टीम ने इसके साथ ही 2015 में भारत में मेजबान टीम के हाथों 0-3 की हार का बदला भी चुकता कर लिया.