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इस देश में धरना-प्रदर्शन रोजाना थोक के भाव होते हैं. हर कस्बे में, हर जिले में, राज्यों में, दिल्ली में. अखबारों में तो एक पन्ने पर अलग कॉलम होता है बाकायदा धरना-प्रदर्शन के लिए. और अब तो सोशल मीडिया भी एक नया हथियार बन गया है. अब भाई भारत एक लोकतांत्रिक देश हैं. वोट के बाद घरना देकर ही इस बात का अहसास हो पाता है. बाकी तो जो मिल जाए वो ठीक. मगर कुछ धरने एकदम अलग होते हैं. उनका मकसद अखबारों में छपना नहीं होता, इंसाफ पाना होता है. ये लड़ाई जीवन-मरन की होती है. ऐसी ही एक लड़ाई एक भाई लड़ रहा है. केरल में. 770 दिन से घरने पर बैठा है. तिरुवनंतपुरम में राज्य सचिवालय के ठीक सामने. फुटपाथ पर. मकसद अपने छोटे भाई को इंसाफ दिलाना है, जिसकी मौत कथित तौर पर पुलिस हिरासत में हो गई थी. श्रीजीत मामले में सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं.

अब पहले मामला समझ लेते हैं. कुलाथूर के रहने वाले श्रीजीत के छोटे भाई श्रीजीव(25) को मोबाइल फोन चोरी के सिलसिले में परासला पुलिस ने 19 मई 2014 को हिरासत में लिया था. दो दिन बाद यहां सरकारी मेडिकल कॉलेज में उनकी मौत हो गई. पुलिस ने दावा किया था कि श्रीजीव ने ज़हर खा लिया था जबकि उनके भाई श्रीजीत का विश्वास है कि पुलिस ने हिरासत में श्रीजीव को मार डाला. एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार श्रीजीव का आरोप है कि उनके भाई की हत्या इसलिए की गई क्योंकि वह उस महिला से प्यार करता था, जो कि एक पुलिस अधिकारी की संबंधी थी.

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अब आप सोच रहे होंगे कि श्रीजीत का मामला इतने दिनों बाद क्यों सामने आ रहा है. वो तो धरने पर दो साल से ज्यादा वक्त से बैठे हैं. वो इसलिए क्योंकि केरल के एक्टर टॉविनो थॉमस हाल ही में श्रीजीत के समर्थन में उतर आए. खुद सचिवालय जाकर श्रीजीत से मुलाकात की. इसका असर ये हुआ कि इसका कैंपेन छिड़ गया. सोशल मीडिया से लेकर सड़क पर. मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने श्रीजीत और उनकी मां को मुलाकात करने के लिए भी बुलाया. इसमें सीएम ने श्रीजीत से कहा कि वो इस मामले को सीबीआई को सौंपने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करें. सरकार इस याचिका का विरोध नहीं करेगी. साथ ही ये भी बताया कि राज्य सरकार ने इस मामले की सीबीआई जांच कराने को लेकर केंद्र सरकार को पत्र भी लिखा था, लेकिन केंद्र ने कोई दिलचस्पी नहीं ली. उन्होंने एक बार फिर केंद्र को पत्र लिखने की बात कही है.

इसलिए सीबीआई जांच पर अड़े

श्रीजीत को हर बार की तरह फिर से सरकार ने सीबीआई जांच के लिए केंद्र को पत्र लिखने का आश्वासन दिया है. मगर श्रीजीत का कहना है कि वो तब तक धरना नहीं खत्म करेंगे जब तक उन्हें इंसाफ नहीं मिल जाता. उन्हें राज्य की पुलिस पर बिल्कुल भरोसा नहीं है. ऐसा इसलिए क्योंकि साल 2016 में पुलिस शिकायत प्राधिकरण ने पाया कि मामले में पुलिस की ओर से किया जा रहा दावा गलत है. रिपोर्ट में कहा कि श्रीजीव की मौत पुलिस हिरासत के दौरान प्रताड़ना की वजह से हुई. मगर कार्रवाई कोई नहीं हुई. परिवार को 10 लाख रुपये का मुआवजा जरूर देने की सिफारिश की गई थी. इसके बाद मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल का गठन किया गया. वो भी डीजीपी की निगरानी में, मगर इसका कोई नतीजा अब तक नहीं निकला है. यही कारण है कि श्रीजीत अब अड़ गए हैं कि जब तक इस मामले में सीबीआई जांच नहीं हो जाती है. उनके भाई की हत्या के दोषी नप नहीं जाते हैं. वो धरना नहीं खत्म करेंगे. चाहे यहीं बैठे-बैठे उनकी जान ही क्यों ना चली जाए.