पकौडा. ..टीव्ही चैनलों पर मुर्गे लडा.ई..जानिये दुनियाभर के पकौडो. के बारे में सबकुछ…

अपने आप में चतुरे समझे जाने वाले सोशल मीडियाई जो वक्त काटने के लिये शाम ढलते ही प्राईम टाईम पर देश के सबसे खतरनाक चैनलों पर हिन्दू-मुस्लिम मुर्गों की लडा.ई देख-देख कर बिल्कुल नही ऊबते वे आजकल सुबह से पकौडों की दुकान खोलकर बैठ जाते हैं. बर्ष २०१४ के चुनाव में चरमकदार हथियार रही चाय का साथी पकौडा. २०१९ में किसका पेट खराब करेगा उस पर विचार से पहले पकौडे के अंतर्राष्ट्रीय इतिहास और उपयोग पर एक नजर…..

भारत में समान्य रूप से पकौडा. कहा जाने वाला वह व्यंजन जो तलकर बनाया जाता है.

विकीपीडिया के अनुसार पकौडा.मूल संस्कृत में “पक्कवट” से निकलकर आया है. इस पकौडे. का “डा”. शब्द की ध्वनि तेलगू भाषियों नें जोडी है. पकौडा. , पकौडी. , फक्कुरा , भज्जी , पोनाका इसके भारतीय नाम हैं जो भारत , पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल में प्रचलित हैं. मुस्लिम बहुल मलाया ( दक्षिण अफ्रीका )  में पकौडा. रोजों के इफ्तार में खाया जाने वाला मुख्य पदार्थ है, जो मुस्लिमों के बीच शादियों ,जन्मोत्सवों और इसी से मिलते जुलते समारोहों की आकर्षक डिश होती है.

केले से बनाया जाने वाले पकोडे. जो दक्षिण भारत के तटीय प्रदेशों से लेकर मध्यभारत में बहुत लोकप्रिय हैं

सुपरिचित ब्रेड पकौडा जो लगभग हर जगह मिलजाता है.

भारत में खाये जाने वाले पकौडोंं के जितने संभव प्रकार हो सकते हैं उतने दुनिया के किसी भी देश में नहीं होते हैे. सादा बेसन के पकौडों से लेकर भज्जी पकौडा. ब्रेड पकौडा. कुट्टू का पकौडा. केला पकौडा. मूंगफली का पकौडा से लेकर विभिन्न सामिष-निरामिष पकौडे देश की पहचान हैं.

कुट्टू के पकौडे.

समूचे दक्षिण एशिया में विभिन्न किस्म की चटनियों के साथ स्वाद लेकर खाया जाने वाला पकौडा ग्रेट ब्रिटेन में बिशेषकर स्काँटलैंड में यौगर्ट दही का एक प्रकार की खास किस्म से बनी करी के साथ परोसा जाता है. भारत में उत्तर भारतीय इसे अलग-अलग घटक मिलाकर इसका स्वाद बेहद लजीज बना देते हैं. तो महाराष्ट्र में कांदा भज्जी का कड.क जायका हर चौराहे पर किसी स्वल्पाहार की दुकान में आसानी से मिल जाता है. गुजराती इसमें भी थोडा.मिठास का जायका मिला देते हैं तो भारत के मध्यप्रांत में चहुंओर इसके स्वाद पर स्थान बिशेष की भौगौलिक परिस्थितियों का स्वाद परिलक्षित होता है. आलू यानि पोटैटो और प्याज अथवा कांदा मतलब आँनियन पकौडा अब पकौडों के इतने सामिष और निरामिष रूप धर चुका है कि पनीर पकौडा , ‍मूंग पकौडा. , साबूदाना पकौडा, मक्का पकौडा , मटर पकौडा, फिश पकौडा., अंडा पकौडा. मटन पकौडा , झींगा पकौडा. और चिकन पकौडा. जैसे एक से एक पकौडे की उनन्त किस्में देशी-विदेशी बाजार में आसानी से उपलब्ध हैं. भारतबर्ष का दक्षिणी भू-भाग पकौडों के स्वाद से अपरिचित नहीं हैं.

मूँगफली के पकौडे.

यहां की भौगोलिक परिस्थितियों में पैदा होने वाले शाकाहारी खाद्य और उत्पादों का पकौडे. बनानें में अच्छा खासा उपयोग होता है. दक्षिण भारत के तटीय क्षेत्रों में नारियल के पकौडे. केले और मूंगफली के पकोडे के अलावा सिंघाडा. या कुट्टू के पकौडे. बहुत खाये जाते हैं. भारत की सांस्कृतिक और भौगौलिक विविधता के चलते अपना रूप बदलने वाले पकौडे. भारत में प्रय सभी वर्गों में समान रूप से पसंद किये जाते हैं..

अफगानी व्यंजनों में पकौडों का आकार बढ. जाता है लेकिन भारत के बंगाल और बिहार में पकुरा और पकौरा नाम से इसकी भूख के बाजार में बहुत मांग है. भूख और गरीबी के लिये जाने वाले देश सोमालिया में इन्हें भजिये ही माना जाता है जबकि चीन और नेपाल इसे फक्कुरा के नाम से जानते हैं.

हग्गिस पकौरा

स्काटलैंड में इस पकौडे.ने जो स्थानीय रूप रखा है उसे “हग्गिस पकौरा” के नाम से जाना जाता है. निरामिष यानि मांसाहारी “हग्गिस पकौरा” में भेड. का दिल लिवर और फेंफडे जैसे अंग काटकर मसलकर डाले जाते हैं.इसे स्काटिश स्नैक्स में आला दर्जे का मकाम हासिल है. पकौडा यौगर्ट की खास चटनी के साथ परोसा जाता है.

हशपपी कार्न

“हशपपी कार्न” यानी मक्का और मक्खन के समन्वय से काली मिर्च के चूर्ण के साथ बनाये गोलियों के आकार में बने पकौडे होते हैं.  इसका मुख्य घटक मक्का ही है. उत्तरी अमेरिका में लोग हशपपी नामक इस पकौडे. के दीवाने होते हैं. सुबह के नाश्ते के अलावा इसे रात के खाने में स्टार्टर के रूप में बीयर और व्हिस्की रम या जिन के साथ बहुत चाव से परोसा या खाया जाता है. कम खाने वाले लोग डिनर के बजाये हशपपी से काम चला लेते हैं. यहां बताना जरूरी होगा कि “हशपपी” अमेरिकन जूतों का भी बहुत लोकप्रिय ब्रांड है.

कोरोक्के

फ्रांस में “कोरोक्के” यानि पकौडे की खोज १८८७ हो चुकी थी. मसले हुए आलुओं में बनाये जाने वाले कोरोक्के लम्बे समय तक डेयरी उत्पादों जैसे क्रीम मक्खन और पनीर के समयोग से बनते रहे. “कोरोक्के” बनाने में बाद में मीट , टूना मछली के मांस आदि का प्रयोग भी होने लगा. सब्जियों में बिशेषकर कद्दू मैक्रोनी और विभिन्न किस्म के पत्ते-पत्तियों को सुगंध के लिये डाला जाने लगा. जापान में भी कोरोक्के की मांग बहुत है. आमतौर पर जापान के किसी भी सुपर बाजार में फ्रीज्ड कोरोक्के तैयार मिल जाते हैं जिन्हें माइक्रोवेव कर तुरंत खानें के लिये तैयार कर लिया जाता है.

अमेरिका के आन्टारियो और आंरेगन रीजन में पकौडों की एक किस्म “ टैटर टाँट्स” कहलाती है. सन् १७५०-६० के दौरान इसे अमेरिकीयों नें बनाना सीख लिया था. १९५३ से यह बहुत प्रचलन में हैं. मूलतया आलू को किसकर मैदा और मसालों के साथ इसे बेलनाकार छोटे-छोटे टुकडों में काटकर इसे बिशेषप्रकार कम से कम तेल में तला जाता है. “टैटर टाट्स” अमेरिका की सुप्रसिद्ध कंपनी एचजे हैन्ज कंपनी जो जेनेरिक उत्पादों की जानी मानी कंपनी है, उसका रजिस्टर्ड पेटेंट वाला ब्रांडेड पकौडा. है. इस ब्रांड के पकौडों की अमेरिका के संयुक्त राज्यों सहित समूचे योरोप में बहुत मांग है. इन्हें वहां टाट्स पोटेटो , राउंड्स पोटेटो, जैम्स टैटर , पफ्स , मैक्सी फ्रईस , टैटै डेट्स के नाम से जाना जाता है. बच्चों के स्कूल लंच में यह आसानी से दिखाई देता है.अमेरिका के बाजार में बहुत लोकप्रिय फास्टफूड है.

टैम्पुरा

“टैम्पुरा” पकौडे. का पुर्तगाली नाम है. जापान में पुर्गाल की इस डिश पर बहुत शोध हुआ है. समुद्री खाने खासकर मछलियों के गोश्त सब्जियों को बेसन मैदा या किसी कार्न किस्म के चूर्ण के साथ घोलकर सीधे मक्खन में तली हुई यह पुर्तगाली डिश पकौडे के विश्वव्यापी होने का जीताजागता प्रमाण है. पुर्तगाल में पकौडों. का यह टैम्पुरा शाकाहारी भी होता है जब इसे ब्रोकली कद्दू  पत्तेदार सब्जियों और कड.क कच्ची खायी जाने वाली सब्जियों के मेल से भी बनता है. पुर्तगाली आमतौर पर मीठे फलों और कच्ची खायी जाने वाली सब्जियों का बहुतायत इस्तोमाल करते हैं .

“ कार्न फ्रिट्टर” दक्षिण यूनायटेड स्टेट और इंडोनेशिया में खाये जाने वाले पकौडे हैं.

कार्न फिट्टर

इनकी बिशेषता यह है कि ये खट्टे मीठे किस्म के पकौडे हैं. माना जाता है कि योरोप के नये स्वरूप में आने पहले हजारों बर्ष से इस प्रकार के पकौडे खाये जाते रहे है. परंपरागत रूप से इंडोनेशिया में काये जाने वाले पकौडे.स्वाद में खट्टे होते हैं लेकिन होते बहुत लजीज हैं. “ कार्न फ्रिट्टर” बनाने की लेटिन अमेरिका की विधि इंडोनेशिया से थोडी. अलग है पर लोकप्रियता दोनों जगह बराबर.

भारत में इन दिनों पकौडों पर राजनीति का बाजार गर्म है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा पकौडे. बेचना एक रोजगार बताये जाने पर विपक्ष और सोशल मीडियाई , प्रधानमंत्री के पक्ष और विपक्ष में सक्रिय हो गये है. पकौडों का कारोबार विश्व में अलग अलग नामों से जिस तरह फैला है उसके परिपेक्ष्य में प्रधानमंत्री मोदी का बयान भले ही सुसंगत हो परन्तु भारतीय जनमानस में सरकारी नौकरी मिलने पर ही रोजगारी माना जाता है. व्यापार-व्यवसाय के प्रति समाज मे उदासीनता के रवैयै के चलते पकौडे तलकर बेचना सामाजिक प्रतिष्ठा के प्रतिकूल समझा जाता रहा है. उदारीकरण के बाद भारत में विदेशी पैकैज्ड फूड का चलन बढा तो भारत की अनेक परंपरागत छोटी और घरेलू मिठाई दुकानों का संचालन करने वाली कई इकाईयां इस व्यवसाय में बहुत अव्वल हैं. लेकिन भारती राजनीति में पकौडा.राजनीति के शिखर पर है. २०१९ के होने वाले राष्ट्रीय आम चुनावों में पकौडा. पक्ष या विपक्ष किसका पेट खराब करेगा यह अभी भविष्य के गर्भ में है.

(  आलेख एवं शोध-संकलन नीरज ओमप्रकाश श्रीवास्तव  )