पूर्व PM खालिदा जिया :

पूर्व PM खालिदा जिया

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया को पांच साल जेल की सजा हुई है. उनके बेटे को 10 साल की सजा सुनाई गई है. चूंकि खालिदा 72 साल की हैं, सो अदालत ने उन्हें ‘बस पांच साल’ की सजा दी है. ये अलग बात है कि ये सजा सश्रम कारावास है. मतलब, कोई आराम नहीं. जेल के दौरान जी-तोड़ काम लिया जाएगा. उन्हें राजधानी ढाका के पुराने सेंट्रल जेल में रखा जाएगा.

खालिदा जिया का एक अनाथालाय है. उसके लिए अंतरराष्ट्रीय फंड लेती थीं वो. आरोप लगा कि वो उस पैसे का इस्तेमाल अपनी पार्टी के कामों के लिए करती हैं. कुल कितने पैसों का करप्शन था ये? करीब एक करोड़ 62 लाख. भारत के नेताओं पर जो करप्शन के आरोप लगते हैं या लग चुके हैं, उसके मुकाबले ये रकम तो पसंगा भर भी नहीं है.

खालिदा जिया कभी भारत समर्थक नहीं रहीं. 2012 में मनमोहन सिंह के कार्यकाल में जब वो भारत दौरे पर आईं, तो काफी उम्मीदें जगीं. मगर नेताओं का एक सिस्टम होता है. विदेशी दौरों पर वो बहुत सारी उम्मीदें देते हैं. चीजें बदलें न बदलें, अलग बात है.

बेनजीर भुट्टो और खालिदा जिया की कुछ बातें एक सी हैं
बेनजीर भुट्टो और खालिदा जिया, दोनों में कुछ बातें एक जैसी थीं. बेनजीर राजनीति में आईं अपने पिता जुल्फिकार अली भुट्टो की राजनैतिक हत्या के बाद. फिर एक सैनिक तानाशाह जिया उल हक के खिलाफ संघर्ष किया और बाद में प्रधानमंत्री बनीं. पाकिस्तान की पहली महिला प्रधानमंत्री. खालिदा की कहानी भी ऐसी ही है. पति जियाउर रहमान की हत्या के बाद उन्होंने पार्टी संभाली. सैनिक तानाशाह एच एम इरशाद के खिलाफ मोर्चा खोला. और फिर चुनाव में जीतकर सरकार बनाई. वो बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं.

खालिदा जिया-शेख हसीना: दांत काटे की दुश्मनी
72 साल की खालिदा बांग्लादेश नैशनलिस्ट पार्टी (BNP) की मुखिया हैं. बांग्लादेश में अभी जो प्रधानमंत्री हैं, उनका नाम है शेख हसीना. उनकी पार्टी का नाम है- बांग्लादेशी आवामी लीग (BAL). BAL और BNP दोनों राजनैतिक विरोधी हैं. बांग्लादेश की दो सबसे बड़ी पार्टियां. शायद इसीलिए खालिदा जिया अपनी सजा को राजनैतिक कार्रवाई बता रही हैं. जिन शेख मुजीर्बुरहमान ‘बंगबंधु’ ने बांग्लादेश बनाया, उनकी ही बेटी हैं शेख हसीना.

शेख हसीना बांग्लादेश के ‘भीष्म पितामह’ शेख मुजीर्बुरहमान की बेटी हैं. बंगबंधु की बेटी. आजादी के चार साल बाद ही उनकी हत्या कर दी गई थी.

बड़ी गहरी है ये दुश्मनी
हसीना और खालिदा के बीच की दुश्मनी कितनी गहरी है, इसकी एक मिसाल देखिए. खालिदा दावा करती हैं कि उनका जन्मदिन 15 अगस्त को आता है. जबकि उनके 10वीं के सर्टिफिकेट में उनकी पैदाइश की अलग तारीख है. शादी के सर्टिफिकेट की तारीख भी अलग है. खालिदा के पास ऐसा एक भी कागजात नहीं, जो उनका बर्थडे 15 अगस्त साबित कर सके. अब आप सवाल करेंगे कि खालिदा इस तारीख को अपना बर्थडे क्यों बताती हैं? वो इसलिए कि इस दिन बांग्लादेश अपना राष्ट्रीय शोक दिवस मनाता है. क्योंकि इसी दिन शेख मुजीर्बुरहमान और उनके परिवार की राजनैतिक हत्या हुई थी.

15 अगस्त, 1975. ये वो तारीख है जब बांग्लादेश राष्ट्रीय शोक मनाता है. इसी दिन बंगबंधु और उनके परिवार की हत्या हुई थी.

पति की हत्या के बाद राजनीति में आईं खालिदा
खालिदा के पति थे जियाउर रहमान. बांग्लादेश के 7वें राष्ट्रपति. पहले सेना में थे. बड़ा नाम था उनका. बांग्लादेश बनने के एक साल बाद, यानी 1972 में उन्हें देश का सबसे बड़ा वीरता पुरस्कार ‘बीर उत्तम’ मिला. वो सेना से राजनीति में आए थे. जिया का नाम बांग्लादेश के इतिहास में अमर समझिए. बस इसलिए नहीं कि वो राष्ट्रपति थे. जब बांग्लादेश बना, तब देश के नेता शेख मुजीर्बुरहमान की ओर से सेना के जिस मेजर ने आजादी वाला पर्चा पढ़ा था, वो शख्स जियाउर रहमान ही थे. 30 मई, 1981 को चितगांव में उनकी हत्या कर दी गई थी. पति की मौत के बाद खालिदा पार्टी में नंबर दो बनाई गईं. नंबर एक थे जस्टिस अब्दुस सत्तार. फिर एक साल बाद, 1984 में खालिदा को पार्टी अध्यक्ष बनाया गया. ये पोस्ट तब से ही उनके पास है.

खालिदा जिया के पति जियाउर रहमान चीन के करीबी थे. उनकी नीतियों का असर खालिदा पर भी रहा. भारत के साथ वो कभी भरोसा नहीं बना सकीं.

खालिदा के पति को चीन पसंद था, भारत नहीं
जियाउर रहमान ही थे, जिन्होंने BNP बनाया था. नए आजाद हुए अपने देश के लिए बहुत काम किया उन्होंने. हां, भारत के नजरिये से देखें तो जियाउर रहमान उसके हितैषी नहीं थे. बांग्लादेश के ‘भीष्म पितामह’ शेख मुजीर्बुरहमान भारत समर्थक थे. उनकी रूस से भी नजदीकी थी. मगर जियाउर रहमान की पसंद अलग थी. उनको चीन भाता था. पश्चिमी देश ज्यादा ठीक लगते थे.

हसीना-खालिदा: भारत किसके करीब?
शेख मुजीर्बुरहमान और जियाउर रहमान में बस ये ही एक फर्क नहीं था. शेख साहब जहां बांग्लादेश को सेक्युलर बनाना चाहते थे, वहीं जिया का झुकाव इस्लाम की ओर था. वो जिया ही थे, जिन्होंने बांग्लादेश के अंदर धर्म के आधार पर बनी राजनैतिक पार्टियों के ऊपर लगे बैन को खत्म किया था. इन दोनों महिलाओं- शेख हसीना और खालिदा जिया की भारत के लिए जो नीतियां रहीं, उसपर काफी हद तक इनकी राजनैतिक जड़ों का असर रहा. यानी, एक पर पिता का असर. दूसरी पर पति का असर. तभी शेख हसीना भारत समर्थक मानी जाती हैं. और खालिदा जिया भारत विरोधी.