Post Office :

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आपका नजदीकी डाकघर जल्द बैंक बनने जा रहा है. अब आप दूसरे बैंकों की तरह इसमें पैसे डिपॉजिट कर सकते है. साथ ही, यह आपको दूसरे बैंकों के मुकाबले कई फ्री सर्विस देगा. डि‍पार्टमेंट ऑफ पोस्‍ट की ओर से जारी एक बयान के मुताबि‍क,इंडि‍या पोस्‍ट पेमेंट बैंक (IPPB) का तेजी से वि‍स्‍तार हो रहा है और अप्रैल 2018 से पूरे भारत में सेवाएं शुरू करने की योजना है. ए पी सिंह के मुताबिक वर्ष 2018 के अंत तक उसके सभी तीन लाख कर्मचारी यह सेवा देने लगेंगे. इसके बाद पहुंच के मामले में यह भारत का दूसरा सबसे बड़ा भुगतान बैंक होगा. 

देश के पुराने बैंक एटीएम और अन्य इंटरनेट बैंकिंग सुविधाओं के लिए पैसे चार्ज करते है लेकिन पोस्टऑफिस पेमेंट बैंक के कस्टमर को एटीएम लेने के लिए अपने किसी तरह का कोई चार्ज नहीं देना होगा. इसी तरह मोबाइल अलर्ट के लिए भी बैंक कोई चार्ज नहीं लेगा. अभी ज्यादातर बैंक 25 रुपए से लेकर 50 रुपए तक एसएमएस अलर्ट के लिए चार्ज लेते हैं. इसी तरह क्वार्टरली बैलेंस मेंटेन करने के लिए भी कोई चार्ज नहीं देना पड़ेगा.

परंपरागत बैंकों के मुकाबले पेमेंट कहीं ज्यादा ब्याज दे रहे है. मौजूदा समय में पेटीएम पेमेंट बैंक और फिनो पेमेंट बैंक परंपरागत बैंकों की तरह डिपॉजिट पर 4 फीसदी ब्याज दे रहे हैं. जबकि, एयरटेल पेमेंट बैंक 7.25 फीसदी और इंडिया पोस्ट बैंक 5.5 फीसदी ब्याज दे रहा हैं. आपको बता दें कि ये पेमेंट बैंक जल्द ही थर्ड पार्टी के जरिए इन्श्योरेंस और म्यूचुअल फंड्स प्रोडक्ट्स भी लॉन्च करने की तैयारी में है.
इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक (IPPB) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ए पी सिंह के मुताबिक वर्ष 2018 के अंत तक उसके सभी तीन लाख कर्मचारी यह सेवा देने लगेंगे. इसके बाद पहुंच के मामले में यह भारत का दूसरा सबसे बड़ा भुगतान बैंक होगा. उन्होंने कहा कि मार्च 2018 तक हमारा पोस्ट बैंक देश के हर जिले में होगा और वर्ष 2018 के अंत से पहले देश के सभी 1.55 लाख डाकघर, सभी डाकिए और ग्रामीण डाक सेवकों के पास इस सेवा की सुविधा देने वाले उपकरण मौजूद होंगे.
इस बैंक की परिकल्पना रिजर्व बैंक के पूर्व गर्वनर रघुराम राजन ने की थी. माना जा रहा है कि इससे बैंकिंग सेक्टर में विविधता आएगी और अब तक बैंकिंग व्यवस्था से दूर रही जनता भी जुड़ेगी. कोई भी उपभोक्ता अपने पहचान पत्र के जरिए इससे जुड़ सकता है. इसके जरिए बैंक ख़ाता खुलवाने के झंझटों से आप बच सकते हैं और कैशलेस इकॉनमी की ओर बढ़ सकते हैं.