संस्कारधानी जबलपुर के जिलहरी घाट पर प्रेमानंद आश्रम में

दिग्विजय-अमृता ने किया अपनी नर्मदा यात्रा का कैम्प

जबलपुर ! मध्ययप्रदेश की संस्कारधानी माने जाने वाले जबलपुर शहर में पूर्वमुख्यमंत्री श्री दिग्विजय सिंह और उनकी पत्नी रानी अमृता सिंह नें जिलहरी घाट पर अपने संगी परिक्रमावासियों के जत्थे के साथ रात्रि प्रवास के लिये कैम्प जमाया. जिलहरी के प्रेमाश्रम में इस सुरम्य रमणीक स्थान पर परिक्रमावासियों सहित श्री दिग्विजय सिंह का सपत्नीक प्रवास अद्भुत रूप से आनंदकारी रहा. प्रकृति की सुंदर और मौलिक हरियाली से आच्छादित् नर्मदा तट पर बना प्रेमानंद आश्रम धार्मिक और वैदिक गतिविधियों के अध्ययन केंद्र के रूप में संस्कारधानी सहित समूचे आध्यात्मिक क्षेत्र में अपनी अलग विशिष्ट पहचान रखता है.

जिलहरीघाट का प्रेमानंदश्रम जगद्गुरू रामांनंदाचार्य स्वामी श्री रामनरेश जी आचार्य श्री मठ पंचधाम बनारस के सानिध्य का धर्मशक्तिपीठ है. यहां के महंत श्रीश्री108 श्री श्यामदास जी महाराज सिद्ध संत हैं. अनेक धार्मिकग्रंथों के ज्ञाता श्री श्यामदास जी महाराज के नियमित सानिध्य में यह आश्रम वेदपाठी बच्चों के लिये गुरूकुल भी है. संस्कारधानी जबलपुर के अलावा देश के विभिन्न राज्यों में फैले इस आश्रम के शिष्य और धर्मप्रेमी श्री नर्मदा सेवा के साथ-साथ जीवंत नर्मदा तट पर विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों को संपन्न कराने यहां पहुंचते हैं. आश्रम व्यवस्था के पं. श्री मैयादीन तिवारी ( रीवा वाले ) आश्रम में किसी धार्मिक अनुष्ठान के निमित्त पहुंचनवाले प्रत्येक आगंतुक की हरसंभव सहायता के लिये वहां प्रभारी के रूप में मौजूद रहते है. मां नर्मदा के प्रति भक्ति, गौ-सेवा धार्मिक, पूजन- पठन, भजन और विभिन्न अनुष्ठानों के साथ-साथ गुरूकुल में विद्य़ाध्ययन करने वाले बच्चे. बहुत कुशाग्र बुद्धि के हैं.. और आश्रम के स्थानीय सेवादार सर्वश्री वेनीप्रसाद जी अवस्थी उनके पुत्र श्री विवेक अवस्थी सुरेन्द्र शुक्ला जी हरिप्रसाद शुक्ला जी राजेन्द्र पांडेय जी अतुल तिवारी जी पंकज दुबे सहित आश्रम से जुडे.सैंकडों. नियमित लोगों के लगातार सहयोग से यहां बारह महीनों धार्मिक गतिविधियां संचालित होती हैं. नर्मदा परिक्रमा यात्रा में श्री दिग्विजय सिंह के साथ चल रहे पूर्व सांसद श्री रामेश्वर नीखरा भी इस आश्रम में नियमित रूप से विभिन्न अनुष्ठान कराते हैं.

 राजा दिग्विजय सिंह मध्यप्रदेश में अपने शासनकाल से भी पूर्व समय से मां नर्मदा के जिलहरी घाट पर बसे प्रेमानंद आश्रम में संतों का सानिध्य लेने स्वयं पहुंचते रहे हैं. उन्हें इस स्थान से नर्मदा के दूसरे तट पर बने गुरूदारे का दृष्य, बहुत मनमोहक दृष्य लगता है. श्री दिग्विजय सिंह संस्कारधानी में मां नर्मदा के तट पर बने लगभग सभी प्रमुख तीर्थघाटों के बारे में स्वयं काफी जानकार हैं. वे उमाघाट , ग्वारीघाट, तिलवारा, जिलहरी जैसे प्राय सभी घाटों के बिषय में जानते , पढते और गुनते रहे हैं. उनके लिये नर्मदा परिक्रमा की मूल प्रेरणा का उद्गम संस्कारधानी जबलपुर में उनके नियमित प्रवास और सानिध्य का ही परिणाम समझा जा सकता है.

जिलहरी घाट पर श्री दिग्विजय सिंह-रानी अमृता सिंह और उनके हमकदम श्री रामेशवर नीखरा के आगमन की आहट से ही प्रेमानंद आश्रम में हर्ष का वातावरण व्याप्त हो गया था. प्रेमानंदश्रम से जुडे. धर्मालु सेवादारों ने श्री सिंह दम्पत्ति की अगुवानी और नर्मदा परिक्रमा से जुडे परिक्रमावासियों के रात्रिप्रवास और भोजन प्रबंधन के लिये अपनी व्यवस्थाऐं तत्काल प्रारंभ करा दीं. परिक्रमावासियों की आवभगत के लिये खीर , मालपुऐ , गुलाबजामुन और पकौडों के अलावा सादा भोजन और फलाहारी भोजन की बहुत संतुलित व्यवस्था की गई. श्री दिग्विजय सिंह और रानी अमृता सिंह नें  जबलपुर में तिलवारा घाट से जिलहरी घाट तक कुछ किलोमीटर का रास्ता तय करने में सुबह से लेकर सांझ तक का समय लगा दिया. मार्ग में मिले अपार स्वागत के दौरान भीड. के दबाब के दबाब को पूरी श्रद्धा से सहते हुऐ नर्मदा परिक्रमावासी सिंह दम्पत्ति देर शाम जिलहरी पहुंच सके. जिलहरीघाट के प्रेमाश्रम में लम्बे समय तक प्रतीक्षा करने पर भी मौजूद जनसमुदाय के उत्साह में कमी नहीं रही. श्री दिग्विजय सिंह नर्मदा परिक्रमा के दौरान धार्मिक मान्यताओं और आस्थाओं के प्रति बहुत सचेत रहते है.पूरी यात्रा के दौरान उन्होंनें हर जगह लगभग वही भोजन किया है जो परिक्रमावासियों को सहज रूप से एकसमान उपलब्ध होता है. इस समूची यात्रा में चमडे. से बनी वस्तुओं को उपयोग नहीं करते रहे. उनके पास अपना निजी सामान भी बहुत कम है. वे हाथ में लाठी और सिर पर गमछा बांध लेते हैं. कमर में बंधी छोटी सी पेटी पैसे रखने के काम आती हैं. वे पूजा-पाठ के दौरान अपनी जेब से ही पैसै देते हैं. खासकर छोटी-छोटी कन्याओं और बच्चों को वे बडे.लाड. से भेंट जरूर देते हैं .लगातार बदलते मौसमों की बयार सह रहे परिक्रमावासियों का जिलहरी घाट के पवित्र वातावरण में रात्रि विश्राम अत्यंत सुखद और धर्मभाव से परिपूर्ण रहा.

सांयकाल मां नर्मदा के उमाघाट पर संस्कारधानी का स्वहाव परिलक्षित होने लगा. उमाघाट पर आयोजित पवित्र नर्मदाष्टक और आरती में हजारों शहरवासी सम्मिलित हुए. इस अवसर पर नगर के अनेक संभ्रांत और प्रतिष्ठत नगरवासियों की उत्साहजनक उपस्थिति से नर्मदा का समूचा वातावरण खिल गया. रोशनी से नहाये उमाघाट पर श्री दिग्विजय दम्पत्ति के साथ श्रीयुक्त रामेशवर नीखरा राज्य सभा सांसद श्री विवेक तन्खा विधायक तरूण भानोट और विवेक अवस्थी के अलावा नगर के सहस्त्रों श्रेष्ठीजन और नागरिक उपस्थित रहे.इस अवसर पर श्री अरूण यादव जबलपुर प्रवास के दौरान श्री सिंह के साथ श्री  नर्मदा आरती में सम्मिलित हुए.

दूसरे दिन प्रेमानंद आश्रम में सिंह दंपत्ति की अपनी दिनचर्या सामान्य रही. अपने नियम के अनुसार श्री सिंह नें अपने कमरे से लगकर बनाये गये पंडाल में तड.के हीं योगा किया. सुबह छह बजे के लगभग उन्होंने साथ चलने वाले परिक्रमावासियों से बातचीत कर व्यवस्था पूछ ली. वे लगभग साढे दस बजे पुन: जब तैयार हो गये. यहां आश्रम में महंत श्री श्यामदास जी महाराज ने श्री राजाराम-सीता की पूजा कराई. पं. श्री मैय्यादीन जी तिवारी साथ.सिंह दम्पत्ति आश्रम के धूनि-स्थल पर पूजा करने भी गये. शिव आराधना के बाद वे सबसे मिले.यहां वे श्री विवेक अवस्थी के परिवार के सब सदस्यों से मिले. बाद में बहुत सारे आगंतुकों के साथ भी चित्र खिंचाने पडे. जिलहरी घाट पर प्रात कालीन श्री नर्मदा आरती में उनके साथ बहुत सारे शुभचिंतकों नें आरती में उनका साथ दिया.

( जबलपुर के जिलहरी घाट प्रेमानंद आश्रम से नीरज ओमप्रकाश श्रीवास्तव की रपट )

सभी चित्रों का छायांकन- प्रतापसिंह राघौगढ.

जलहरी घाट का विहंगम दृष्य
छोटी-छोटी मजबूत नावें हमेंशा इस घाट पर मौजूद रहती है. घाट के उस पार ले जाकर श्रद्धालु डुबकियां लगाते हैं
जलहरी घाट पर नियमित आने-जाने वालों नें मंदिर को आकार देना शुरू कर दिया है.
प्रेमानंद आश्रम में स्थापित शिवलिंग.
प्रेमानंद आश्रम की भव्य भोजनशाला का चित्र
जलहरी घाट का एक नजारा.
श्री प्रेमानंद आश्रम में ऱामसिया मंदिर के बाहर विराजे हनुमान जी.
नर्मदा परिक्रमा के दौरान साकेत धाम, जबलपुर, में स्वामी श्री गिरीशानंद सरस्वती जी महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी अखिलेश्वरानंद गिरि, श्री स्वामी श्याम दास जी महाराज, स्वामी मुक्तानंद जी का आशीर्वाद लने के दौरान श्री दिग्विजय सिंह-अमृता सिंह .,श्री रामेश्वर नीखरा जी.

नर्मदा परिक्रमा के 134वें दिन, दिनांक 10 फरवरी 2018 शनिवार को रमनगरा, तिलवारा घाट में भगवान महादेव जी का रुद्राभिषेक तत्पश्चात माँ नर्मदा की प्रातः काल आरती एवं कलश पूजन।