सिंभावली के खिलाफ पहला मामला :सिंभावली

नई दिल्लीः सार्वजनिक क्षेत्र की ओरिएंटल बैंक आफ कामर्स (ओबीसी) ने आज कहा कि सिंभावली शुगर्स बैंक को दिए गए कर्ज की वसूली न हो पाने का (गैर-निष्पादित परिसंपत्ति) का उसका मामला पहले का है और इस संबंध में जांच एजेंसी सीबीआई को पहली रिपोर्ट सितंबर 2015 में दी गई थी।

बैंक ने शेयर बाजारों को बताया कि, ‘‘सीबीआई के पास पहली शिकायत तीन सितंबर 2015 को कराई गई थी और एक संशोधित शिकायत 17 नवंबर 2017 को की गई। यह मामला प्रक्रियाओं के अनुसार अब दर्ज किया गया है। सीबीआई ने 97.85 करोड़ रुपए के ऋण धोखाधड़ी मामले में सिंभावली शुगर्स, उसके चेयरमैन गुरमीत सिंह मान, उप-प्रबंध निदेशक गुरपाल सिंह तथा अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया है। बैंक ने कहा है कि सिंभावली शुगर्स एक पुराना एनपीए खाता है। निर्धारित प्रक्रिया के तहत इसके बारे में रिजर्व बैंक तथा सीबीआई को शिकायत की गई थी इस अवरुद्ध कर्ज के संबंध में हानि-लाभ के खाते में पूंजी का प्रर्याप्त प्रावधान किया जा चुका है और इसके कारण उसके लाभ पर कोई असर नहीं पड़ेगा। सिंभावली शुगर्स देश की बड़ी चीनी मिलों में से एक है।

जांच एजेंसी ने कंपनी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी जीएससी राव, मुख्य वित्त अधिकारी संजय तापडिय़ा, कार्यकारी निदेशक गुरसिमरन कौर मान तथा पांच गैर-कार्यकारी निदेशकों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है। गुरपाल सिंह पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिन्दर सिंह के दामाद हैं। सीबीआई ने निदेशकों के निवास, कारखाने, कारपोरेट कार्यालय तथा कंपनी के दिल्ली में पंजीकृत कार्यालय समेत आठ परिसरों में कल तलाशी ली। जांच दो कर्जों पर केंद्रित है। पहला कर्ज 97.85 करोड़ रुपए का था जिसे 2015 में धोखाधड़ी करार दिया गया। दूसरा कर्ज 110 करोड़ रुपए का था। इसका उपयोग पुराने कर्ज के भुगतान में किया गया। दूसरे कर्ज को 29 नवंबर 2016 को एनपीए घोषित किया गया।