नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। एक समय टेलीकॉम उद्योग में कई सर्किल में प्राइस-वार को हवा देने और उसके फायदे लेने वाली कंपनी एयरसेल अब दिवालिया होगी। कंपनी ने आखिरकार वित्तीय दबाव के आगे घुटने टेक दिए। बुधवार को दिवालियापन की राह पर कदम रखते हुए एक बयान में कंपनी ने कहा कि टेलीकॉम सेक्टर में एक नई कंपनी आई है, जिसने बाजार के गणित को बदल दिया है। इसके साथ ही कानूनी व नियामक संबंधी चुनौतियों, असहनीय कर्ज और बढ़ते घाटे ने मिलकर उसे न सिर्फ कारोबारी नुकसान पहुंचाया है, बल्कि उसकी साख को भी धक्का लगा है।

एनसीएलटी में दिया आवेदन-

सूत्रों ने बताया कि कंपनी ने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) को दस्तावेज सौंप कर दिवालिया घोषित किए जाने की प्रक्रिया शुरू करने का आग्रह किया है। एक बयान में कंपनी ने कहा कि उसके कॉरपोरेट कर्जदारों के निदेशक बोर्ड ने एयरसेल सेल्युलर, डिशनेट वायरलेस और एयरसेल लिमिटेड के लिए इंसॉल्वेंसी एंड बैंक्रप्सी कोड-2016 के तहत कॉरपोरेट इंसॉल्वेंसी रिजोल्यूशन प्रक्रिया शुरू करने संबंधी आवेदन दिया है।

कंपनी ने कहा कि उसने अपने वायरलेस बिजनेस का विलय किसी अन्य कंपनी में करने का भी प्रयास किया। लेकिन उसे कोई साझीदार मिल नहीं पाया और उसका वायरलेस कारोबार सितंबर 2017 में स्वतः निरस्त हो गया। बयान में कंपनी ने यह भी कहा कि प्रक्रिया शुरू करने से पहले उसने लेनदारों तथा शेयरधारकों से कर्ज पुनर्गठन और नए कर्ज की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की। लेकिन कंपनी के शेयरधारक और लेनदार इन मसलों पर एकमत नहीं हो सके।

कंपनी ने जनवरी 2018 में भी रणनीतिक कर्ज पुनर्गठन की संभावनाओं पर विचार किया। लेकिन इन तमाम प्रक्रियाओं के बावजूद किसी समझौते पर नहीं पहुंच पाने के चलते ही आखिरकार कंपनी ने दिवालिया घोषित होने की राह पर कदम रखे। कंपनी ने यह भी कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में इंसॉल्वेंसी एंड बैंक्रप्सी प्रक्रियाओं के तहत निदान खोजना ही सबसे सही कदम है।