राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अखिलभारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक शुरू : पहले दिन प्रतिवेदन का खुलासा

राष्ट्रीयस्वयंसेवक संघ करेगा भारत की भाषा-बोलियों के विकास का समग्र प्रयास- डा.कृष्णगोपाल

( रेशीमबाग डा.हेडगेवार भवन नागपुर से नीरज ओमप्रकाश श्रीवास्तव की रपट)

नागपुर . राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ समूचे भारतबर्ष में बोली जाने वाली भाषाओं के अलावा दूरस्थ अंचलों में बोली जाने वाली विभिन्न स्थानीय बोलियों के विकास के लिये समग्र प्रयास आरंभ करेगा. रेशीमबाग नागपुर में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की तीन दिवसीय अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा के पहले दिन संचार माध्यमों के प्रतिनिधियों को सभा के कार्यक्रमों और एजेंडे के बिषय मे जानकारी देते हुए संघ के सहकार्यवाहक डा.कृष्णगोपाल नें उपरोक्त जानकारी दी. उन्होंने कहा कि देशभर में विभिन्न अंचलों में बोली जाने वाली बोलियां हमारे देश के मौलिक विचार की अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम हैं. उन्होंने कहा कि इन बोलियों के माध्यम से गाये जाने बाले गीतो , नाटकों और लोक कला के द्वारा   अभिव्यक्त विचार हमारे राष्ट्रीय चिंतन को अभिव्यक्त करते हैं. संचार माध्यमों के प्रतिनिधियों से बातचीत के दौरान उनके साथ संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख डा. मनमोहन वैद्ध भी उपस्थित रहे. इस दौरान बर्ष 2017-18 में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की विभिन्न गतिविधियों का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया.

पर्यावरण विज्ञान में डाक्टरेट सहकार्यवाहक डा.कृष्णगोपाल मूलत उ.प्र. के मथुरा से हैं. 1982 में वे संघ के प्रचारक तदुपरांत काशी व असम राज्य में संघ के क्षेत्रीय प्रचारक रहे हैं.वर्मान में वे संघ के दिल्ली मुख्यालय से संघ की गतिविधियों में भागीदारी करते है. अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि देशभर के 95 प्रतिशत से भी अधिक जिलों के लगभग 1538 प्रतिनिधि इस महाअधिवेशन में हिस्सा लेने आये हैं जिनमें 25 प्रतिनिधि महिलाये इसमें शामिल हैं. संघ के कोई 35 संबद्ध संगठनों के प्रतिनिधि भी यहां अपनी भागीदारी करेंगे.

उन्होंने राष्ट्रीय संवयं सेवक संघ की बर्ष 2017-18 में संपन्न गतिविधियों का प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए बताया कि संघ का विस्तार बहुत तेजी से हो रहा है. देशभर के सभी राज्यो में आलोच्य बर्ष में 58967 स्थानो पर प्रतिदिन नियमित शाखायें संचालित हो रही है.जबकि 16405 स्थानों पर संघ के स्वयंसेवक साप्ताहिक बौद्धिक में भाग लेते है और 7976 स्थानों पर मासिक रूप से संघ मंडली परस्पर भेट कर विभिन्न कार्यक्रमों की रूपरेखा और संचालन करती है. इस प्रकार प्रत्येक माह में देशभर के 83348 स्थानों पर नियमित रूप से संघ की दैनंदिन गतिविधियां संचालित की जा रही है.

 राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संवयंसेवकों के बौद्धिक और शारिरिक रूप से मजबूत बनाने के लिये प्रत्येक बर्ष सामान्य और बिशेष प्रशिक्षण दिया जाता है. इस प्रशिक्षण कार्यक्रम को संघ शिक्षा वर्ग कहा जाता है. प्रशिक्षण वर्ग को वरिष्ठता के अनुसार प्रथम , दितीय और तृतीय वर्ग के रूप में दिया जाता है जो देश के विभिन्न संघ प्रान्तवर्गों के द्वारा दिया जाता है. प्रथम बर्ष बिशेष तथा तृतीय वर्ग बिशेष प्रशिक्षण देकर स्वयं सेवकों की बौद्धिक और शारिरिक क्षमता दृढ बनाने के अलावा संघ की रीति-नीति और कार्य व्यवहार के संबंध में बिशेष प्रशिक्षण दिया जाता है. बर्ष 2017-18 में प्रथम बर्ष का प्रशिक्षण 9734 स्थानों पर दिया गया जिसमें 15716 प्रतिभागी रहे. दितीय बर्ष का प्रशिक्षण 2959 स्थानों पर दिया गया जिनमें 3796 प्रतिभागियों नें संघ की रीति नीति को सीखा. प्रथम बर्ष बिशेष में 2146 स्थानों पर 3012 और तृतीय बर्ष बिशेष प्रशिक्षण में 697 स्थानो पर 716 संख्या में प्रतिभागी प्रशिक्षित किये गये. बर्ष 2017-18 में प्रथमिक शिक्षा वर्ग के कुल 1180 वर्ग हुए जिनमें देशभर की 27814 शाखाओं में 95318 स्वयं सेवकों को प्रशिक्षित किया गया.

 प्रतिवेदन में सरसंघसंचालक श्री मोहन भागवत के द्वारा आलोच्यबर्ष में राष्ट्रीय स्तर पर किये गये विभन्न कार्यक्रमों में प्रवास की जानकारी साझा की गई है.सरसंघसंचालक के प्रवास के संबंध में उनके द्वारा रामकृष्ण मठ के अध्यक्ष स्वामी स्मरणानंद जी , मुंबई में दाउदी बोहरा समाज के सम्माननीय सैयदाना साहब , ईशा फाउंडेशन के सद्गुरू जग्गी वासुदेव जी, हंस फाउंडेशन के भोले जी महाराज तथा मंगला माताजी तथा भारत के राष्ट्रपति डा. रामनाथ कोबिंद से हुई मुलाकात को रेखांकित किया गया है.सरकार्यवाह के प्रवास के प्रतिवेदन में सेवागाथा वेवसाईट तेलंगाणा प्रांत में कार्यकर्ता शिविर राउरकेला देहरादून सिलीगुडी और मालवा प्रान्त के धार जिले में होने वाले कार्यक्रमों का उल्लेख किया गया है.

संघ के कार्यविभाग वृत के संबंध में जानकारी देते हुए प्रतिवेदन के माध्यम से बताया गया है कि शारिरिक विभाग के अन्तर्गत अखिल भारतीय प्रहार महायज्ञ उपक्रम विगत तीन बर्षों से तल रहा है.प्रहार यज्ञ में शाखाओं की , स्वयंसेवकों की संख्या में निरंतर वृद्धि हो रही है.बौद्धिक विभाग , प्रचार विभाग और संपर्क विभाग की गतिविधियों के अलावा गौ-सेवा और समरसता के कार्यक्रमों का लेखा जोखा दिया गया. प्रंतों में संपन्न बिशेष कार्यक्रमों के अन्तर्गत केरल में प्रवासी कार्यकर्ता शिविर , तमिलनाडु में प्रौढ. साप्ताहिक मिलन सांघिक , तेलंगाणा में विजयदशमी उत्वस बिशेष प्रयोग, आंध्रप्रदेश में महाविधालयीन विद्यार्थी कार्य , कोकण में हिंदू चेतना संगम , पश्चिम महाराष्ट्र में संत संगम ,मध्यभारत में महाविघालय परिसरों में स्वामी विवेकानंद दिवस तथा जागरण श्रेणी कार्यक्रम विदिशा (मध्यप्रदेश) में विगत 12 जनवरी को सरसंघचालक डा मोहन भागवत की उपस्थिति में हुए कार्यक्रम को रेखांकित किया गया. महाकौशल में छतरपुर विभाग एकत्रीकरण और राष्ट्रशक्ति पातालकोट (छिंदवाडा.) , चित्तौड. में सामाजिक समरसता बैठकें, जयपुर में स्वर गोविंदम् उदघोष दिल्ली हरियाणा में कार्यविस्तार ,पलवल जिले का समरस गंगा महोत्सव का बिशेष उल्लेख प्रतिवेदन में किया गया.

मेरठ में राष्ट्रोदय स्वयंसेवक समागम , दक्षिण बिहार दक्षिण बंग,उत्तर असम और दक्षिण असम के लुइतपरिया हिन्दू समावेश और अगरतला में संपन्न हिंदू सम्मेलन को प्रतिवेदन में मुख्य रूप से बताया गया.

प्रतिवेदन में राष्ट्रीय परिदृष्य पर कहा गया है कि देशभर में अपने कार्य के प्रति विश्वास के साथ अपेक्षाएं भी बढी. है, यह हम अनुभव करते आये है. विभिन्न प्रांतों में संपन्न कार्यक्रमों में हिन्दु समाज की सहभागिता से यही अनुभव आ रहा है. पूर्वोत्तर के राज्यों में आयोजित हिन्दू सम्मेलन बिशेषत त्रिपुरा राज्य का सम्मेलन कई बातों में प्रेरक नुभव देने वाला रहा है. सामाजिक ,धार्मिक , औद्योगिक क्षेत्रों के महानुभावों का प्रकट होने वाला प्रतिभाव अपने कार्य की स्वीकार्यता प्रदर्शिक करता है.

इसके साथ ही समाज में आपसी संघर्ष की घटनायें सबके लिये चिंता का बिषय हैं. ऐसी घटनाओं में घटित हिंसा , सार्वजनिक संपत्ति को होने वाला नुकसान-पूर्णत निंदनीय है. भूतकाल से पाठ लेकर वर्तमान मे निर्माण होने वाली समस्याऐं सुलझाकर सौहार्दपूर्ण एवं स्वस्थ्य वातावरण बनाना लबकी प्रथमिकता बननी चाहिये. ऐसे अवसरों पर विभाजवकारी तत्वों से सावधान रहने की आवश्यकता रहती है.

वैसे हा समाजमन को आहत करने वाली घटनायएं भी घटती रहती हैं और सामूहिक रूप से आक्रोश प्रकट होता है. संबंधित पक्षों को यह ध्यान रखनें की आवश्यकता रहती है कि किसी भी कारण से, व्यवहार से, जनभावनाओं और समाज के सम्मान को ठेस न पहुंचे.हम सबका मिलकर एक बृहद परिवार है, अत परस्पर संबंध और विश्वास सशक्त रूप से बना रहना चाहिये. ऐसे अवसरों पर धार्मिक , सामाजिक , राजनीतिक नेतृत्व की सकारात्मक पहल महत्वपूर्ण बन जाती है.

न्याय व्यवस्था,सुरक्षा व्यवस्था आदि के प्रति सम्मान और विश्वास को धकेका न लगे, इसकी चिंता होनी चाहिये. संविधान , कानून व्यवस्था में अपनी बात रखने का अधिकार हमें प्रप्त है. उन मर्यादाओं का पालन भी आवश्यक है.समाज में विभेद, भ्रांत धारणा फैलाने वाली शक्तियाँ सक्रिय होती दिखाई देती हैं. इन सारी परिस्थतियों में अत्यंत संयम और कुशलता के साथ कार्य करते हुए अपने कार्य की सफलता में ही प्रशनों का समाधान है, यह विश्वास रखते हुए हमें परिश्रमपूर्वक आगे बढना है.संघ कार्य ही हम सबके जीवन का ध्येय बने.

#RSS #आरएसएस
संघ की प्रतिनिधि सभा मे भारतीय भाषाओं के संरक्षण एवं संवर्द्धन की आवश्यकता के लिए प्रस्ताव पारित किया गया।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ
अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा, युगाब्द 5119
रेशिमबाग नागपुर
फाल्गुन कृष्ण 8-9 युगाब्द 5119 (9-11 मार्च 2018)
प्रस्ताव

भारतीय भाषाओं के संरक्षण एवं संवर्द्धन की आवश्यकता
अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा का यह मत है कि भाषा किसी भी व्यक्ति एवं समाज की पहचान का एक महत्त्वपूर्ण घटक तथा उसकी संस्कृति की सजीव संवाहिका होती है। देश में प्रचलित विविध भाषाएँ व बोलियाँ हमारी संस्कृति, उदात्त परंपराओं, उत्कृष्ट ज्ञान एवं विपुल साहित्य को अक्षुण्ण बनाये रखने के साथ ही वैचारिक नवसृजन हेतु भी परम आवश्यक हैं। विविध भाषाओं में उपलब्ध लिखित साहित्य की अपेक्षा कई गुना अधिक ज्ञान गीतों, लोकोक्तियों तथा लोक कथाओं आदि की मौखिक परंपरा के रूप में होता है।
आज विविध भारतीय भाषाओं व बोलियों के चलन तथा उपयोग में आ रही कमी, उनके शब्दों का विलोपन व विदेशी भाषाओं के शब्दों से प्रतिस्थापन एक गम्भीर चुनौती बन कर उभर रहा है। आज अनेक भाषाएँ एवं बोलियाँ विलुप्त हो चुकी हैं और कई अन्य का अस्तित्व संकट में है। अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा का यह मानना है कि देश की विविध भाषाओं तथा बोलियों के संरक्षण और संवर्द्धन के लिये सरकारों, अन्य नीति निर्धारकों और स्वैच्छिक संगठनों सहित समस्त समाज को सभी सम्भव प्रयास करने चाहिये। इस हेतु निम्नांकित प्रयास विशेष रूप से करणीय हैं:-
1. देष भर मेें प्राथमिक शिक्षण मातृभाषा या अन्य किसी भारतीय भाषा में ही होना चाहिये। इस हेतु अभिभावक अपना मानस बनायें तथा सरकारें इस दिशा में उचित नीतियों का निर्माण कर आवश्यक प्रावधान करें।
2. तकनीकी और आयुर्विज्ञान सहित उच्च शिक्षा के स्तर पर सभी संकायों में शिक्षण, पाठ्य सामग्री तथा परीक्षा का विकल्प भारतीय भाषाओं में भी सुलभ कराया जाना आवश्यक है।
3. राष्ट्रीय पात्रता व प्रवेश परीक्षा (नीट) एवं संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित परीक्षाएँ भारतीय भाषाओं में भी लेनी प्रारम्भ की गयी हैं, यह पहल स्वागत योग्य है। इसके साथ ही अन्य प्रवेश एवं प्रतियोगी परीक्षाएँ, जो अभी भारतीय भाषाओं में आयोजित नहीं की जा रही हैं, उनमें भी यह विकल्प सुलभ कराया जाना चाहिये।
4. सभी शासकीय तथा न्यायिक कार्यों में भारतीय भाषाओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिये। इसके साथ ही शासकीय व निजी क्षेत्रों में नियुक्तियों, पदोन्नतियों तथा सभी प्रकार के कामकाज में अंग्रेजी भाषा की प्राथमिकता न रखते हुये भारतीय भाषाओं को बढ़ावा दिया जाना चाहिये।
5. स्वयंसेवकों सहित समस्त समाज को अपने पारिवारिक जीवन में वार्तालाप तथा दैनन्दिन व्यवहार में मातृभाषा को प्राथमिकता देनी चाहिये। इन भाषाओं तथा बोलियों के साहित्य-संग्रह व पठन-पाठन की परम्परा का विकास होना चाहिये। साथ ही इनके नाटकों, संगीत, लोककलाओं आदि को भी प्रोत्साहन देना चाहिये।
6. पारंपरिक रूप से भारत में भाषाएँ समाज को जोड़ने का साधन रही हैं। अतः सभी को अपनी मातृभाषा का स्वाभिमान रखते हुए अन्य सभी भाषाओं के प्रति सम्मान का भाव रखना चाहिये।
7. केन्द्र व राज्य सरकारों को सभी भारतीय भाषाओं, बोलियों तथा लिपियों के संरक्षण और संवर्द्धन हेतु प्रभावी प्रयास करने चाहिये।
अ. भा. प्रतिनिधि सभा बहुविध ज्ञान को अर्जित करने हेतु विश्व की विभिन्न भाषाओं को सीखने की समर्थक है। लेकिन, प्रतिनिधि सभा भारत जैसे बहुभाषी देश में हमारी संस्कृति की संवाहिका, सभी भाषाओं के संरक्षण एवं संवर्द्धन को परम आवश्यक मानती है। प्रतिनिधि सभा सरकारों, स्वैच्छिक संगठनों, जनसंचार माध्यमों, पंथ-संप्रदायों के संगठनों, शिक्षण संस्थाओं तथा प्रबुद्धवर्ग सहित संपूर्ण समाज से आवाहन करती है कि हमारे दैनन्दिन जीवन मेें भारतीय भाषाओं के उपयोग एवं उनके व्याकरण, शब्द चयन और लिपि में परिशुद्धता सुनिश्चित करते हुये उनके संवर्द्धन का हर सम्भव प्रयास करें।

@newsbiryani.com