तीन राज्यों के बाद अब यूपी उपचुनावों पर नजर

   यूपी उपचुनावों में भाजपा को मिल रही है कडी. टक्कर,योगी की प्रतिष्ठा दाँव पर

पूर्वोत्तर राज्यों के चुनावों के बाद सबकी नजर यूपी के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री द्वारा खाली की गई सीटों के उपचुनावों पर लगी है। वहां पर विधानसभा में भाजपा को मिली ऐतिहासिक जीत और योगी आदित्यनाथ के सत्ता संभालने के बाद यह शक्ति परीक्षण का पहला मौका है। हालाकि यूपी के गोरखपुर और फूलपुर के साथ ही बिहार के अररिया लोकसभा उपचुनाव भी है लेकिन यूपी पर ज्यादा ध्यान केद्रित होने का कारण योगीजी की शासन प्रणाली प्रमुख है। इन तीनों ही सीटों पर 11 मार्च को मतदान होना है। 
नेहरू परिवार की सीट रही है फूलपुर-
जो खबरें मिल रही हैं उसके मुताबिक यूपी में भाजपा को कड़ी टक्कर मिल रही है। इसमें भी फूलपुर सीट पर बसपा ने सपा को समर्थन देकर भाजपा की राह को मुश्किल कर दिया है। यह वह सीट है जो नेहरू परिवार की मानी जाती रही है। पं. जवाहरलाल नेहरू भी इसी सीट से लड़ते रहे और उनकी बहन विजयलक्ष्मी पंडित भी यहीं से लोकसभा में पहुंची थी। समाजवाद के पुरोधा डॉ. राममनोहर लोहिया और छोटे लोहिया जनेश्वर मिश्र के अलावा पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह भी फूलपुर से लोकसभा पहुंच चुके हैं। 2014 में भाजपा के उम्मीदवार केशव प्रसाद मौर्य की जीत ने सपा के लगातार चार बार जीतने के क्रम को तोड़ा था। केशवप्रसाद के उप्र के उपमुख्यमंत्री बन जाने के बाद रिक्त हुई सीट पर हो रहे इस उपचुनाव में योगी की प्रतिष्ठा भी दाव पर लगी है। 
पांच बार सांसद बन चुके है योगीजी-
योगीजी की प्रतिष्ठा उनके गृहनगर गोरखपुर की सीट पर भी दाव पर है। वहां पर हुई 34 बच्चों की मौत के मामले ने मुद्दे को गरमा दिया है। यह वह सीट है जहां महंत आदित्यनाथ पांच बार जीते हैं तथा उनके गुरु महंत अवैद्यनाथ तीन बार मैदान मार चुके हैं। यह भी उल्लेखनीय है कि 1984 के बाद यहां से केवल भाजपा के ये ही दो चेहरे जीते हैं। 11 मार्च को ही बिहार के अररिया लोकसभा सीट पर भी मतदान हो रहा है जो राजद सांसद मो. तस्लीमुद्दीन के निधन के कारण रिक्त हुई है। इस सीट को राजद ने भाजपा से छीना था। इसलिए भाजपा के उम्मीदवार उपेंद्र शुक्ला को इस बार खासी मेहनत करना पड़ रही है।
2018 के अंत में होगा बडा सेमीफाइनल-
 इन उपचुनावों के बाद इसी साल के अंत तक पांच राज्यों के आम चुनाव भी हो जाएंगे आगामी लोकसभा चुनावों का बड़ा सेमीफाइनल कहा जा सकता है। किसी भी हाल में 25 मई से पहले कर्नाटक, 18 दिसंबर से पहले मिजोरम, 5 जनवरी 2019 से पहले छत्तीसगढ़, 7 जनवरी 2019 से पहले मप्र, 20 जनवरी 2019 से पहले राजस्थान विधानसभा के चुनाव संपन्न होना है। इसी तरह सन 2018 में ही दिल्ली राज्य के कुछ उपचुनाव भी होंगे। ये सारे चुनाव ऐसे हैं जो कि केंद्र सरकार के गठन की भूमिका में अहम भूमिका निभाएंगे। चुनावों की इस बेला में देश भर के 59 राज्यसभा सदस्य भी इस वर्ष रिटायर हो रहे हैं और 23 मार्च तक इनके भी चुनाव पूरे हो जाएंगे।
आलेख- नगीन बारकिय़ा
(श्री नगीन बारकिया वरिष्ठ लेखक और समीक्षक हैं )