संघ की बैठक में जाते हुए तोगडिया जी.

संघ की बैठक में तोगडि.या का मौन व्रत , अमित शाह को ठहराया संघ इमारत के बाहर

नागपुर !  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तीन दिवसीय अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में पहले दिन की समाप्ति के बाद देर रात विश्वहिन्दू परिषद के अध्यक्ष श्री प्रवीण तोगडिया के संघ बैठक में पहुंच जाने की पुष्टि हो गई. वही  रात्रि नौ बजे नियमित विमान से भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित शाह भी नागपुर पहुंच गये है. इस बैठक में शामिल होने आये श्री शाह और श्री तोगडिया ही ऐसे नेता हैं जिन्हे संघ की इमारत के बाहर ही ठहराया गया है.

श्री शाह और श्री तोगडि.या संघ की इस अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में भाग लेने वाले ऐसे दो प्रतिनिधि रहेंगे जिन्हें देशभर से बैठक के लिये आये प्रतिनिधियों के साथ अलग से समय बिताने को समय नहीं मिल सकेगा. देशभर के विभिन्न जिलों से आये समस्त 1538 प्रतिनिधियों में ये दोनो महानुभाव ही ऐसे हैं जिन्हें नागपुर के रेशीमबाग स्थित डा.हेडगेवार भवन में नहीं रूकने दिया गया है.

इस समय डा.प्रवीण तोगडि.या नें मौन व्रत धारण कर लिया है. बताया जा रहा है कि वे मौन हैं और अपने साथ होने वाले किसी भी अन्याय के संबंध में मौन ही रहेंगे. उनकी अपेक्षा है कि संघ में इस बिषय पर अन्य प्रमुख लोग चर्चा कर कुछ कहें और बोलें. वे संघ के अन्य प्रतिनिधियों के साथ ठहराने के बजाय किसी निजी परिचित के यहां ही रात्रि विश्राम करेंगे. हाल ही में हुए कथित हमले और दुर्घटना को लेकर  बैठक में कोई सुगबुगाहट नहीं है.

इधर देर रात को मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडनवीस के कतिपय समर्थकों के साथ नागपुर की महापौर नंदाताई जिचकार ने नागपुर विमानतल पर श्री अमित शाह की अगवानी की. श्री शाह अखिल भारतीय प्रतिनिधिसभा की बैठक में अब 11 मार्च तक रहेंगे किन्तु उन्हें डा.हेडगेवार भवन में ठहराने के बजाय अन्य स्थान पर ठहरने को कहा गया है. बताया जाता है कि श्री शाह और श्री तोगडि.या का आमना- सामना न हो इस डर से दोनों को हेडगेवार भवन में नहीं ठहराया गया, वैसी कोई बात नहीं हैं. बल्कि इन नेताओं की सुरक्षा कारणों से इनके अन्यत्र  ठहरनें की अनुमति संघ नें दी है. ये दो ऐसे प्रमुख नेता हैं जो अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा के दौरान अन्य प्रमुख प्रतिभागियों के साथ संघ की इमारत में ठहराने के बजाय बाहर अन्यत्र कहीं ठहर गये हैं.

संघ कार्यालय में बैठक के दौरान अभूतपूर्व अनुशासन देखने को मिल रहा है. यहां तक कि नियमित रूप से संघ की गतिविधियों में शामिल रहने वाले जिन स्वयंसेवकों को किसी व्यवस्था में कोई जिम्मेदारी नहीं दी गई है तो वे स्वयंसेवक अनावश्यक रूप से बैठक और डा.हेडगेवार भवन के आसपास भी नहीं पहुंच रहे है. इसे अभूतपूर्व अनुशासन एवं प्रबंधन का अदितीय उदाहरण माना जा सकता है कि हजारों लोगों के रूकने ठहराने और बैठक के लिये प्रबंधन में किसी भी प्रकार की कोई कमी दिखाई नहीं देती. ऐसा भी नहीं है कि इस प्रकार के इंतजाम करने में करोडों रूपये का अपव्यय किया गया हो. संघ परिसर में ऐसे बडे.-बडे आयोजन मितव्ययिता से किये जाने को प्रबंधन का श्रेष्ठ उदाहरण समझा जा सकता है.

संघ के स्वयंसेवकों नें ही संपूर्ण व्यवस्थाओं के दायित्व संभाल रखे हैं. यहां तक कि व्हीआईपी सुरक्षा और अन्य प्रमुखजनों के लिये भी स्थानीय पुलिस का जमावडा. न के बराबर है. लेकिन संघ के स्वयंसेवक मजबूती और दृढता से विभिन्न दाय़ित्व संभाले हुए हैं.

पत्र-पत्रिकाओं के प्रतिनिधियों और इलेक्ट्रानिक संचार माध्यमों के प्रतिनिधि डा हेडगेवार भवन के द्वार से लगे मैदान तक ही पहुंच सकते हैं. यहां संवाद कक्ष बनाया है जहां जलपान कर विभिन्न प्रेस प्रतिनिधि ब्रीफिंग लेते हैं. बैठक में फोटोग्राफर्स को मात्र 10 मिनट प्रवेश दिया गया ताकि वे बैठक के चित्र ले सकें.

बैठक की भीतरी कार्रवाई में प्रतिनिधियों के अलावा कोई भी अन्य व्यक्ति प्रवेश नही पा सका. मंचासीन सरसंघसंचालक और सहकार्यवाहक के अतिरिक्त सभी महत्वपूर्ण व्यक्तियों को सामने जमीन पर भारतीय पद्धति से बैठाया गया.

बैठक के पहले दिन डा. कृष्ण गोपाल और डा.मनमोहन वैद्य नें प्रतिवेदन संबंधी ब्रीफिंग के अलावा संचार माध्यमों के प्रतिनिधियों से एक शब्द भी अतिरिक्त बोलने की बजाय बात समाप्त कर दी.

आश्चर्यजनक रूप से इलेक्ट्रानिक मीडिया से जुडे. संवाददाता कोई साईकिल स्टैंड के पास तो कोई संघ बिल्डिंग की पृष्ठभूमि बनाकर मनगढत रूप से रिपोर्ट भेजनें के लिये कहानी सुनाते हुए रिकार्डिंग कराते रहे. संघ की इस बैठक के लिये देश-विदेश से मीडिया प्रतिनिधि नागपुर पहुंचे हैं.

( नीरज ओमप्रकाश श्रीवास्तव की रिपोर्ट )