दिग्विजय सिंहदिग्विजय सिंह

चुनावी साल में मध्यप्रदेश कांग्रेस पूरी रणनीति के साथ काम करने में जुटी है। प्रदेश के दिग्गज नेताओं को भरोसे में लेने के साथ जिम्मेदारी भी तय होना है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की ३५०० किमी की नर्मदा परिक्रमा आठ अप्रैल तक पूरी होने की संभावना है। पार्टी में कोई भी बड़ा निर्णय लेने से पहले पार्टी उन्हें भरोसे में लेना चाहती है। परिक्रमा पूरी होते ही कोर कमेटी भी अस्तित्व में आ जाएगी।

जीत की जिम्मेदारी भी
पार्टी का प्रयास है कि जिस नेता का जहां प्रभाव होगा, उसे वहां की जिम्मेदारी दी जाए। टिकट तय करने और अनुशंसा में भी इनकी राय अहम होगी। जो जिस नेता की सिफारिश करेगा उसे उस उम्मीदवार को जिताने की जिम्मेदारी भी लेना होगी।

चेहरा कोई नहीं, क्षेत्र में करना होगा फोकस
विधानसभा चुनाव में भले ही सीएम चेहरे की मांग उठ रही हो, लेकिन यह सैद्धांतिक तौर पर तय हो गया है कि चुनाव में कोई चेहरा नहीं होगा। ऐसे में नेताओं को अपने-अपने क्षेत्र में प्रभावी ढंग से काम करना होगा।

60 साल की अधिक उम्र के नेता न लें टिकट
बावरिया ने कहा कि 60 साल से अधिक उम्र के नेताओ से चुनाव में टिकट नहीं मांगने का अनुरोध मेरा उन नेताओ के बारे में हैं, जो अभी तक 4-5 चुनाव लड़ चुके है और निरंतर 2-3 चुनाव हार चुके हो। उन लोगों से मेरा अनुरोध है कि वे विधानसभा चुनावो में टिकट की दौड़ से खुद को बाहर कर युवाओं को आगे आने का मौका दें। हालांकि बाद में बावरिया ने अपनी बात संभालते हुए कहा कि इसका आशय ना तो वर्तमान सिटिंग विधायकों के टिकट के संबंध में है और ना ही उन वरिष्ठ नेताओ के संबंध में हैं जो निरंतर चुनाव जीत रहे है। यदि वह योग्य हैं तो उनसे मेरा इस तरह का कोई अनुरोध नहीं है।

कोर कमेटी का गठन जल्द होगा। कोर में शामिल होने वाले नेताओं के नाम मैं अभी शेयर नहीं कर सकता।
-बावरिया, मध्यप्रदेश कांग्रेस प्रभारी