साध्वी उमाभारती की चिट्ठी……पढकर दिग्गी दम्पत्ति हुए भावुक…..

 

  नर्मदा पदयात्रा परिक्रमा समापन से चंदघंटो पूर्व साध्वी उमाभारती की पाती पढकर श्री दिग्विजयसिंह भाव -विभोर हो गये. इस चिट्ठी का मसौदा दिग्विजय सिंह के लिये किसी महत्वपूर्ण पदक से कम नहीं है, क्योंकि ये वही साध्वी उमाश्री भारती हैं जिन्होंने 2003 में मध्यप्रदेश की भाजपा राजनीति का चेहरा बनकर श्री दिग्विजय सिंह को सत्ता से बेदखल कर दिया था. इस चिट्ठी में परस्पर स्नेह की भाषा स्पष्ट महसूस की जा सकती है.

साध्वी उमाश्री सचमुच एक ऐसी जननेत्री के रूप में मध्यप्रदेश की जनता के लिये श्री दिग्विजय का विकल्प बनकर उभरी थी. सुश्री उमा भारती नें राजनीति के मल्लयुद्ध के दौरान दिग्विजय सिंह को बहुत भला-बुरा भी कहा और सत्ता के समर में हराया भी. लेकिन इसे ही पुण्यदायिनी मां नर्मदा का आशीष कहा जा सकता है कि वही उमाश्री भारती दिग्विजय सिंह को बडे. भाई के रूप में संबोधित कर ऐसा पत्र लिख रहीं हैं कि दिग्विजय सिंह भावुक हुए बगैर रह न सके.

उमाश्री लिखती हैं कि आ. भाई साहब श्री दिग्विजय सिंह जी, आपकी सपत्नीक नर्मदा परिक्रमा सानंद संपन्न हुई इसके लिये आपको बधाई देती हूं. आपने एवं आपकी धर्मपत्नी नेंनर्मदा परिक्रमा की पुरातन मान्यतों की रक्षा करते हुए ,इस परिक्रमा को संपन्न किया, यह अनुकरणीय है.

मेरी अभिलाषा भी थी कि यदि आप अपने नर्मदा परिक्रमा के भंडारे मे बुलायेंगे तो मैं जरूर जाऊंगी. तथा आपने मुझे सम्मान के साथ टेलिफोन पर बात करके बुलाया भी ,किन्तु मेरा दुर्भाग्य कि जिन तिथियों मेंआपकी परिक्रमा के समापन का भंडारा होना है उसी दिन चंपारण, बिहार में दिनांक 10 अप्रैल 2018 को माननीय प्रधानमंत्री जी स्वच्छता अभियान को संबोधित करेंगे.यह कार्यक्रम हमारे ही विभाग द्वारा आयोजित हुआ है इसलिये मैं तो 8 अप्रैल की शाम को ही चंपारण चली जाऊंगी.

आप तो जानते ही होंगे होंगे कि बर्ष में एक बार स्वयं गंगा जी भी नर्मदा जी में स्नान करके स्वयं को पवित्र करने के लिये आती हैं. मेरे पास अभी भी गंगा की स्वच्छता का दायित्व है इसलिये मुझे तो स्वयं भी नर्मदा जी के आशीर्वाद की आवश्यकता है.

चंपारण कार्यक्रम समाप्त होते ही 10 अप्रैल के बाद आप दोनों जहां भी होंगे, आप दोनों को गंगाजल भेंट करके , आप दोनों का आशीर्वाद लूंगी तथा इस परिक्रमा से प्राप्त पुण्य में से थोडा. सा हिस्सा आप दोनों मुझे भी दीजियेगा. इसी मनोकामना के साथ आपकी छोटी बहन(उमाश्री भारती).

पत्र पढकर दिग्विजय सिंह भावुक हुए तो  उनके साथ अर्धांगिनी अमृता को भी रोना आ ही गया.

बीते 192 दिनों से जिस दिनचर्या और परिक्रमावासियों के साथ नियमित सानिध्य था उनकी विदाई और बिछुडने के समय भी सिंह दम्पत्ति अपने भावातिरेक को रोक न सके.

– (newsbiryani.com team)