अमेरिका ही नहीं पूरी दुनिया की सबसे बड़ी खबर यह है कि फेसबुक के सीईओ मार्क ज़करबर्ग अमेरिकी सीनेट के वाणिज्य और न्यायपालिका समितियों के सामने मंगलवार को पेश हुए.

वे वहां सोशल नेटवर्क पर डेटा गोपनीयता और उसके साथ रशियन संबंध की चर्चा करने के लिए पेश हुए थे. उस दौरान जो कुछ हुआ उसे हम एक सिरीज़ में प्रस्तुत कर रहे हैं जिसकी अंतिम कड़ी में हम पूरा सार भी प्रस्तुत करेंगे. पहली और दूसरी कड़ी हम पहले ही आपको पढ़वा चुके हैं. तीसरी कड़ी में पढ़ते हैं सेनेटर चक ग्रेसिली ने क्या कहा –

सेनेटर चक ग्रेसिली: धन्यवाद, सीनेटर फ़िंस्टीन

सेनेटर चक ग्रेसिली

फेसबुक का इतिहास और विकास हमारे कई तकनीकी दिग्गजों का प्रतिबंब है. 2004 में मिस्टर ज़करबर्ग द्वारा स्थापित फेसबुक पिछले 14 वर्षों में एक्सप्लोड (तेज़ी से विकास) हुआ है. फेसबुक में वर्तमान में दुनिया भर में 2 अरब से अधिक मासिक सक्रिय उपयोगकर्ता हैं, 25,000 से अधिक कर्मचारी हैं, और यूएस के 13 शहरों और अन्य विभिन्न देशों में कार्यालय हैं.

अपने बढ़ते यूज़र-बेस की तरह ही फेसबुक उपयोगकर्ताओं के डाटा कलेक्शन में भी असीमित बढ़ोतरी हुई है. वो स्कूलों, लाइक्स और रिलेशनशिप-स्टेट्स से कहीं आगे बढ़ गया है. आज फेसबुक के पास उन डेटा पॉइंट्स तक भी पहुंच है जिसका विस्तार आपके द्वारा क्लिक किए गए विज्ञापनों से लेकर आप जिस इवेंट में शामिल हैं उस इवेंट की आपके मोबाइल डिवाइस के आधार पर प्राप्त लोकेशन तक है.

यह कोई सीक्रेट नहीं कि फेसबुक विज्ञापन के ज़रिए इस डेटा से पैसे कमाता है, हालांकि कई लोग इस तथ्य से या तो उलझन में हैं या पूरी तरह से अनजान हैं. फेसबुक ने 2017 में $ 40 बिलियन का रेवेन्यू उत्पन्न किया, जिसमें से 98 प्रतिशत फेसबुक और इंस्टाग्राम में विज्ञापन से आया.

मार्क ज़करबर्ग सेनेटर चक ग्रेसिली से हाथ मिलाते हुए

गूगल, ट्विटर, एप्पल, और अमेज़ॅन पर भी काफी मात्रा में डेटा संग्रह हो रहा है. इन कंपनियों द्वारा पेश किया जा रहा उत्पादों और सेवाओं का विस्तृत पोर्टफोलियो इन्हें अपने ग्राहकों के बारे में और अधिक मात्रा में जानकारी एकत्र करने के लिए अंतहीन अवसर प्रदान करता है.

जैसे-जैसे हम अमेरिकी उपभोक्ता अधिक मुफ़्त या बेहद कम लागत वाली सेवाएं प्राप्त करते हैं, वैसे-वैसे हमें और अधिक व्यक्तिगत डेटा प्रदान करना होता है. डेटा के संग्रह के आधार पर आगे विकास और इनोवेशन की संभावनाएं असीमित है. हालांकि दुरुपयोग की संभावना भी काफ़ी हैं.

जबकि अभी भी कैंब्रिज एनालिटिका की स्थिति का प्रकाश में आना ज़ारी है, फिर भी स्पष्ट रूप से यहां पर उपभोक्ता के विश्वास का उल्लंघन और डेटा का संभावित अनुचित हस्तांतरण हुआ था. न्यायपालिका समिति कैम्ब्रिज और अन्य डेटा गोपनीयता के मुद्दों की अलग से सुनवाई करेगी.

इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि इन घटनाओं ने उपभोक्ताओं की अपेक्षाओं और हमारे समाज में डेटा गोपनीयता के भविष्य पर एक बड़ी चर्चा की शुरुआत की है.

इसने यह भी खुलासा किया है कि उपभोक्ता पूरी तरह से समझ नहीं पा रहे हैं कि किस स्तर तक उनके डेटा को एकत्रित, संरक्षित, स्थानांतरित और इस्तेमाल किया जाता है और उसका उपयोग और दुरुपयोग किया जाता है.

दशकों से विज्ञापन और राजनीतिक अभियानों में डेटा का उपयोग किया जा रहा है. लेकिन प्राप्त किए गए डाटा की संख्या और उसके प्रकार ने एक बहुत नाटकीय परिवर्तन देखा है. राष्ट्रपति बुश, ओबामा और ट्रम्प सहित कईयों के अभियानों ने इस बढ़ते डेटा का उपयोग कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, खासतौर पर फेसबुक पर किया है. इन्होंने इसका उपयोग माइक्रो-टार्गेटिंग और निजीकरण पर ध्यान देने के लिए किया.

राष्ट्रपति ओबामा के अभियान ने कैंब्रिज एनालिटिका की तरह ही फेसबुक का उपयोग करते हुए एक एप विकसित किया था, जो न केवल उपयोगकर्ताओं बल्कि उनके लाखों दोस्तों के बारे में भी जानकारी एकत्र करने के लिए था.

2012 के उस कैंपेन के डिजिटल डायरेक्टर ने इस डेटा-स्क्रैपिंग ऐप (वाइंड-अप) के बारे में कहा था,’इस अभियान के लिए विकसित टेक्नोलॉजी का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा वाइंड-अप है’.

इसलिए इन सोशल मीडिया रणनीतियों की प्रभावशीलता पर बहस की जा सकती है लेकिन पिछले वर्षों में इनका राजनीतिक क्षेत्रों में उपयोग, और इनके बढ़ते महत्व को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है. डेटा गोपनीयता और सुरक्षा को लेकर बनने वाली नीतियों को इन परिवर्तनों के साथ तालमेल रखना चाहिए.

डेटा गोपनीयता उपभोक्ता की जरूरतों और उम्मीदों के अनुसार होनी चाहिए. अब उपभोक्ताओं को कम से कम अपने डेटा-शेयरिंग के बारे में इन्फॉर्मड निर्णय लेने और इसका उपयोग कैसे किया जा सकता है को लेकर आवश्यक पारदर्शिता मिलनी चाहिए.

उपभोक्ताओं को स्पष्ट जानकारी होनी चाहिए. अपारदर्शी नीतियां और जटिल क्लिक-थ्रू कंसेंट पेज नहीं होने चाहिए. डेटा गोपनीयता और सुरक्षा पर व्यापक और बढ़ती चिंताओं का जवाब देना और जनता के विश्वास को बहाल करना टेक इंडस्ट्री का दायित्व है.

यथा-स्थिति अब काम नहीं कर रही. इसके अलावा कांग्रेस को यह निर्धारित करना होगा कि यदि और कैसे इन उत्पादों का उपयोग करने वाले अरबों उपभोक्ताओं के लिए पारदर्शिता और समझ को सुनिश्चित करने के लिए गोपनीयता नियमों को मजबूत करने की आवश्यकता है.