आखिरकार खत्म हुआ लवगुरू मटुकनाथ और लव ऐंजल जूली का वैलैंटाईन…

( न्यूज बिरयानी समाचार सेवा )

पटना ! बहुचर्चित रहे प्रोफेसर मटुकनाथ और उनकी प्रेमिका व शिष्या जूली के बीच एक दशक से भी अधिक से चल रहा वैलैंटाईन लव लगभग खत्म हो गया है. लवगुरू मटुकनाथ इन दिनों अकेले हैं और तलाश रहे हैं अपने बीते दिनों खो चुके जीवन का अस्त्तित्व. जूली उन्हे छोड.कर जा चुकी हैं. लवगुरू अदालत के फेसले को मानकर अपनी पूर्व पत्नी को तीन-चौथाई पगार और पेंशन जीवन भर चुकायेंगे. स्टाकहोम में रहने वाला उनका बेटा भी अब उनसे कोई संपर्क नहीं रखता.

इस घटना पर और अधिक जानने बिश्लेषण के इच्छुक समाज को भी बहुत बडा. सबक है कि वे मामूली से मामूली लोगों को मीडिया की लापरवाहीपूर्ण रिपोर्टिंग के चलते अपने जीवन का आदर्श मान बैठते हैं. इस मामले में कौन सही या कौन गलत है इसका फैसला करने की बजाय पूर्वाग्रहों से मुक्त होकर विचार किया जाना जरूरी है.

पटना  में एक दशक पहले ही 64 साल के एक प्रोफेसर मटुकनाथ चौधरी ने अपनी 21 बर्षीय शिष्या जूली कुमारी को अपने जीवन का प्यार बताते हुए उनके साथ जीवन बिताने का  फैसला किया था। उनके लिए उन्होंने अपनी पत्नी को भी छोड़ दिया था। कालांतर में मटुकनाथ की इस शिष्या जूली   के जीवन के प्यार ने इन दिनों अध्यात्म का रुख कर लिया है और प्रेम के लिए चर्चित ‘लव गुरु’ मटुकनाथ इन दिनों तन्हा अपना जीवन बिता रहे हैं। जूली मटुकनाथ से जुदा हो गयी हैं

इस बारे में मटुकनाथ से प्रश्न किये जाने पर पर उन्होंने कहा, ‘कोई नहीं जानता कि परिस्थितियां कब बदल जाएं। हमारे साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। हम करीब दस साल तक साथ रहे। फिर अचानक जूली का सांसारिक मोह-माया से लगाव हटने लगा।’ बता दें कि मटुकनाथ की जूली से मुलाकात 2004 में हुई थी जब वह 51 साल के थे और जूली 21 साल की थीं। दो साल बाद उनके प्यार की सुर्खियां अखबारों और टीवी न्यूज चैनल्स की हेडलाइन बनने लगी और पटना के बीएन कॉलेज में हिंदी प्रफेसर मटुकनाथ चौधरी कुछ दिनों मुश्किलों से घिरे । लेकिन देश के बुद्धिमान मीडिया की वजह से मटुकनाथ देश में लवगुरू की छवि पा गये.

यूनिवर्सिटी ने पहले उन्हें निलंबित किया और बाद में कॉलेज से निकाल दिया। उनकी पत्नी ने टीवी पत्रकारों के साथ उस घर पर छापा पड़वाया जहां वह अपनी स्टूडेंट के साथ लिव इन में रह रहे थे। उनकी पत्नी ने मटुकनाथ को गिरफ्तार भी करवाया और आरोप लगाया कि वह स्टूडेंट्स को ज्यादा नंबर देने का वादा करके प्रलोभन देते थे। इसके बाद मटुकनाथ ने तलाक और यूनिवर्सिटी से निलंबन की बहाली के लिए कोर्ट के चक्कर भी लगाए।

पिछले हफ्ते उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में आश्वासन दिया कि वह अपनी सैलरी या पेंशन का एक तिहाई हिस्सा उम्र भर अपनी पत्नी को भत्ते के रूप में देते रहेंगे। फिलहाल इन दिनों वह बिल्कुल अकेले हैं। यहां तक कि स्टॉकहोम में रह रहा उनका बेटा भी उनसे बात नहीं करता।

प्यार में उम्र कभी बाधा न बनी  जूली कहती थी कि हमारी मेंटल एज एक जैसी है .

बीएचयू और जेएनयू जैसी प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी की डिग्रीहोल्डर जूली को करीब चार साल पहले अध्यात्म में रुचि आई। इसके बाद उन्होंने पुड्डुचेरी, ऋषिकेश, पुणे में ओशो आश्रम में समय बिताना शुरू कर दिया। मटुकनाथ कहते हैं, ‘जब-जब वह पटना आती थी तो कुछ दिनों के लिए मेरे साथ रहती थी। आखिरकार हमने तय किया कि वह फुलटाइम अध्यात्म की शरण में रहेंगी।’ मटुकनाथ कहते हैं कि वह शांति की खोज के लिए जूली को मुक्त करना चाहते थे। लेकिन सूत्र बताते हैं कि जूली को ज्ञान प्राप्त हो गया कि अभी उसके जीवन में कितनी संभावनायें है. संभव है इसी विचार ने उन्हें मटुकनाथ से किनारा कर लेने का हौसला दिया.

वैसे तो कहा जा रहा है कि दोनों की उम्र में इतना भारी अंतर उनके बीच कभी मुद्दा नहीं बना। वह बताते है , ‘जूली आज भी कहती हैं कि हमारी मेंटल ऐज समान है।’ मटुकनाथ जूली के साथ अपने खुशहाल दिनों की तस्वीरें दिखाते हैं। एक तस्वीर में वह खुशमिजाज नजर आ रहे हैं और साइकल रिक्शा चला रहे हैं जबकि जूली रिक्शे की सीट पर बैठी हुई हैं। एक दूसरी तस्वीर में जोड़ा एक-दूसरे को फूल भेंट कर रहा है। तस्वीरो के अलावा भी उन्होंने बहुत प्रचार प्रसार पाया युवाओं के अनेक आयोजनों में मटुकनाथ और जूली की जोडी. हीरो-हीरोईन सी छायी रही

लोगों का नजरिया बदला है हालांकि इस प्रेम कहानी ने उनके जीवन में काफी हंगामा भी खड़ा किया, जो उनके सुख के पलों में किसी काले बादल की तरह मंडराते रहे। मटुकनाथ को यूनिवर्सिटी में अपने निलंबन की बहाली के लिए प्रदर्शन भी करना पड़ा था। वह पटना में राजभवन क सामने प्रदर्शन करते रहे, भूख हड़ताल भी की और आखिरकार कोर्ट का रुख किया। 2011 में यूनिवर्सिटी ने उन्हें बहाल कर दिया था लेकिन अपने स्टूडेंट्स के साथ डांस करते हुए एक यूट्यूब विडियो के सामने आने के बाद उन्हें फिर से निलंबित कर दिया गया।

इसके बावजूद प्रफेसर का कहना है कि लोगों का नजरिया उनके प्रति बदला है। वह कहते हैं, ‘जब मेरी पत्नी ने पूरे देश के सामने मुझे अपमानित किया तब लोगों ने मेरा मजाक बनाया, वे मुझपर हंसते थे लेकिन आज वही लोग प्यार के प्रति मेरे यकीन पर मेरी तारीफ करते हैं। मुझे कोई पछतावा नहीं है। मैंने वही किया जो मुझे सही लगा। लोग अपनी राय बनाने के लिए आजाद हैं।’

  वैलेंटाईन डे पर गिफ्ट दी थी कार अब खोलेंगे प्रेम की पाठशाला
2013 में जब यूनिवर्सिटी ने उन्हें निलंबनकाल का उनका बकाया वेतन करीब 20 लाक रुपये सौंपा तो उन्होंने जूली को वैलंटाइंस डे के दिन 6.3 लाख की कार गिफ्ट की थी। मटुकनाथ अब पटना के शास्त्रीनगर में एक अपार्टमेंट में अकेले रह रहे हैं और अक्टूबर महीने में वे पटना विवि से   रिटायर होने वाले हैं। उन्होंने अपने रिटायरमेंट के बाद का प्लान भी बनाया है। प्रफेसर ने बताया कि रिटायरमेंट के बाद वह भागलपुर जिल में अपनी प्रेम पाठशाला खोलेंगे और स्टूडेंट्स को प्यार और विश्वास का पाठ पढ़ाएंगे।

पूरी जिंदगी वेतन और पेंशन का एक-तिहाई हिस्सा पत्नी को देंगे

अपनी शिष्या के साथ प्रेम संबंध के लिए चर्चित लवगुरू मटुकनाथ चौधरी ने सुप्रीम कोर्ट की सलाह पर अपनी पत्नी के साथ मामला सुलझा लिया है।हाल ही में को सुप्रीम कोर्ट में उन्होंने आश्वासन दिया कि वह अपनी पूरी जिंदगी वेतन और पेंशन का एक-तिहाई हिस्सा पत्नी को देंगे।

पटना यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर मटुकनाथ उस समय सुर्खियों में आए थे, जब उनकी पत्नी ने टीवी पत्रकारों की मदद से उस घर में छापा मारा था जहां वह अपनी पूर्व शिष्या के साथ लिव इन में रह रहे थे। यहां उनकी पत्नी ने उन्हें रंगे हाथों पकड़ा था। इसके बाद उन्होंने सार्वजनिक रूप से जेएनयू से पासआउट स्टूडेंट जूली कुमारी से अपने प्रेम को जाहिर किया था।
मटुकनाथ के चेहरे पर उनके संबंधियों समेत कई लोगों ने मिलकर कालिख भी पोती थी। इसके बाद उनकी पत्नी ने उन्हें घर से भी निकाल दिया था। वकालत कर रहीं उनकी पत्नी ने उनके खिलाफ घरेलू हिंसा ऐक्ट के तहत मामला दर्ज कर गुजारा भत्ता की सिफारिश की थी। दोनों का एक बेटा भी है जो स्वीडन मे रहता है। 2014 में निचली अदालत ने बीएन कॉलेज में हिंदी के प्रफेसर मटुकनाथ चौधरी को अपनी पत्नी को 25 हजार रुपये का गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया था।

प्रोफेसर ने दी थी सुप्रीम कोर्ट में दलील -कोर्ट ने उन्हें 2007 से 18.5 लाख रुपये बकाया राशि देने का आदेश भी दिया था। इसके बाद मटुकनाथ ने पटना हाई कोर्ट से अपील की थी जहां उनकी याचिका को ठुकरा दिया था और ट्रायल कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा गया। इसके बाद प्रफेसर ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। उन्होंने यहां दावे के साथ कहा कि 2007 में उनकी सैलरी मात्र 35 हजार रुपये थी और निचली अदालत द्वारा आदेशित गुजारे भत्ते की राशि काफी ज्यादा है। उन्होंने यह भी कहा कि वह होम लोन के लिए 50 हजार रुपये प्रति महीना ईएमआई चुका रहे हैं।

पीड़ित पत्नी की तरफ से अधिवक्ता दुर्गा दत्त और करुणाकर महालिक ने जस्टिस कुरियन जोसेफ के नेतृत्व वाली बेंच से कहा कि हाई कोर्ट और निचली अदालत का आदेश सही है। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान में प्रफेसर की सैलरी 1.8 लाख रुपये है। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने आपसी तालमेल से विवाद सुलझाने को कहा। सुप्रीम कोर्ट की सलाह पर मटुकनाथ और उनकी पत्नी के बीच सुप्रीम कोर्ट के परिसर में ही बातचीत हुई जिसके बाद वह एक समझौते पर पहुंचे।

कोर्ट में दायर ज्ञापन के अनुसार मटुकनाथ ने अपनी सैलरी/पेंशन का एक तिहाई अपनी पत्नी को गुजारा भत्ता के रूप में देने का आश्वासन दिया और साथ ही बकाया भत्ते को दिसंबर तक भरने की बात कही। इसके बाद दोनों पक्षों ने एक दूसरे के खिलाफ केस भी वापस ले लिए। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि भविष्य में अब किसी भी पक्ष की तरफ से फाइनेंशियल क्लेम का केस नहीं आना चाहिए।

 

बिन्दु पाण्डेय विजेता सुप्रीम कोर्ट ने जेएनयू वाली का पक्ष न लिया

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Niraj Shrivastava देश के तमाम वामपंथियों , न्यूज चैनलों और नवाचार के विचारकों ने जेएनयू वाली का ही साथ दिया..समाज ने भी जेएनयू वाली को बहुत मान दिया .जगह -जगह सम्मान दिया .लवगुरू का खिताब दिया…बताईये कौन जीता..?

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बिन्दु पाण्डेय विजेता कौन जीता? मुझे तो संस्कारों और एक पत्नी और स्त्री के अस्मिता की हार दिखाई दी

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Anoop Mishra बिन्दु पाण्डेय विजेता जी। कथित लव गुरू को जूली छोड कर चली गयी है। पत्नी ने पहले ही छोड रखा है। संस्कृति और संस्कार के तिरस्कार से यही फलित होता है।

Niraj Shrivastava वह असामान्य आयु का परस्पर बेमेल वैवाहिक गठबंधन था..इस तरह के शारिरिक संबंध भी एक सीमा तक ही चल पाते है. ये बात बहुत लोग तब भी जानते थे कि वह मूर्ख नवयौवना एक अनुभवी चतुर पुरूष के बरगलाने का शिकार हुई है…पर देश के जागरूक लोग , निजी जीवन की मनचाही स्वतंत्रता के पक्षधर इसे सही बता रहे थे. अँतत वही हुआ जो होना था अब जूली कोई नया रंगरूट पकडे.गी ….यही लवगूरू का शाश्वत सिद्धांत है.

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Anoop Mishra Niraj Shrivastava जी जूली भी जेएनयू की स्कालर थी। बच्ची नहीं थी की मटुकनाथ उसे भरमा लेते। हां दोनों ने एक दूसरे के साथ गेम किया और यूज किया।

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Niraj Shrivastava परस्पर आवश्यकताओँ पर निर्भरता से उपजा आकर्षण जेएनयू ही नही समूचे विश्व में प्रेम समझा जाता है…जैसे ही इन आवश्यकताओँ का समापन हो जाता है वह प्रेम निश्वास हो जाता है..आपकी बात से सहमत हूं कि कोई किसी को बरगला नहीं सकता..वह नवयौवना अब प्रौढा. होकर किसी और आवश्यकता के वशीभूत जल्द ही लवगुरू के शाश्वत सिद्धांतों मे नवसृजन प्रतिपादित करेगी.
Anoop Mishra बिलकुल। बुढौती मे अपने कुकर्म की सजा भुगतेंगे लवगुरु अकेलेपन के रूप में। वहीं लोग जब हंसेंगे तो उस पीडा का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।

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Niraj Shrivastava उनकी पीडा. से हमारे चिंतन को समर्थन नहीं मिलता. वे पीडित हों हम ऐसा भी नहीं चाहते….उनके बीच यदि किसी भी आकर्षण के कारण यदि प्रेम था तो वह उचित या अनुचित था मेरा ऐसा कोई कथन नहीं है.

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Niraj Shrivastava परन्तु समाज के समक्ष इस घटना से जो निष्कर्ष निकलकर आते हैं उनपर बिना पूर्वाग्रहों के स्वस्थ्य बहस हो. उसमें अकारण किसी नारीवादी सोच को न घुसाया जाये और न ही किसी अपराधी पुरूष को बचाने की बात हो. ..हमारी संस्कृति इतनी प्राणवान हे और इतनी दृढ. है कि किसSee More

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Reply1hEdited

बिन्दु पाण्डेय विजेता नीरज जी ! भारतीय परंपरा मे सबकी बखुबी व्याख्या दी हुई है. नारी और पुरुष के दायरे भी । जो जितना जिम्मेदार वह उतना बड़ा दोषी होता है

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Anoop Mishra चाणक्य ने भी कहा था। राजा की छोटी गलती पृ भी उसे कडी सजा मिलने पर जनता मे सकारात्मक संदेश जाता है। अपराधी अपराध करने से डरते हैं।