जयवर्धन के विदिशा दौरे का मकसद , शिवराज इनाम देते हैं सिर्फ एक बार….

 

(नीरज ओमप्रकाश श्रीवास्तव की रपट)

विदिशा !  मध्यप्रदेश की राजनीति में विदिशा का महत्व बीते कई दशकों से रेखांकित किया जाने वाला रहा है. भारतीय जनती पार्टी के लिये तो विदिशा लोकसभा और विधानसभा क्षेत्र सदा से बडे. ही सहयोगी साबित हुए हैं जहां भाजपा को चुनाव जीतनें के लिये आमतौर पर किसी चुनौती का सामना नहीं करना पड.ता है. मुख्य प्रतिद्वंदी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस यहां बरसों से असफलता ही झेल रही है. कांग्रेस के नवनियुक्त प्रदेशाध्यक्ष कमलनाथ की चुनावी रणनीति के तहत बीते दिनों विदिशा पहुँचे राघौगढ.के विधायक जयवर्धन सिंह का एक दिवसीय दौरे का मकसद क्या था…….? यह जानना कांग्रेस से जुडे. लोगों के लिये तो महत्वपूर्ण है. हालांकि ये बात तो हर कांग्रेस कार्यकर्ता ने जान ही ली कि नबंबर माह के चुनावों के लिये तैयार हो रहे विदिशा कांग्रेस संगठन के प्रभारी के रूप में जयवर्धन सिंह की मौजूदगी का पर्यवेक्षकीय नतीजा ही प्रत्याशियों के चयन का आधार बनेगा. इसी प्रकार भारतीय जनता पार्टी में विदिशा से टिकट इस बार कौन ले पायेगा उसको लेकर राजनीतिक अटकलें लग रही है. विदिशा संसदीय क्षेत्र से निकट संबद्धता के कारण मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की इच्छा से ही विदिशा विधानसभा का भारतीय जनतापार्टी प्रत्याशी तय होगा. लेकिन जो राजनीतिक बिश्लेषक शिवराज सिंह चौहान को करीब से जानते हैं,उन्हें पता है कि विदिशा में शिवराज एक व्यक्ति को राजनीतिक रूप से एक ही बार महत्व देते हैं. भाजपा के कार्यकर्ताओं को शिवराज इनाम देते हैं सिर्फ एक बार क्योंकि विदिशा में उनके करीबियों, राजनीतिक सहयोगियों और सहकर्मियों की तादाद बहुत ज्यादा है और वे सबको बार-बार राजनीतिक महत्व देकर अन्य अनुशासित कार्यकर्ताओं के साथ अन्याय नहीं करना चाहते.

सबसे पहले विदिशा में हाल ही में संपन्न विधायक जयवर्धन सिंह के दौरे की बात. इस संक्षिप्त से दौरे के दौरान विधायक जयवर्धनसिंह नें कडी.धूप के बाबजूद विदिशा कांग्रेस संगठन कार्यकर्ताओं मे मौजूदा सरकार के खिलाफ निर्णायक जंग लडे. जाने का हौसला बहुत करीब से देखा. विधायक जयवर्धनसिंह सुबह 11 बजे राघौगढ से निकले थे, देवपुर(सिरोंज) के रास्ते विदिशा जिले में अपनी आमद दर्ज कराते ही उनका सामना कांग्रेस पार्टी से जुडे.तीन-चार सौ लोगों ने उनकी अगवानी की. इंकाजन रवि उपाध्याय के साथ राकेश पालीवाल राजेश बघेल बांसखेडी, सुरेन्द्र अहिरवार,चंदू बघेल, अवध शर्मा, गोलू गौड., महेन्द्र रघुवंशी, गगनेंद्र रघुवंशी नें यहां स्नेहिल अगवानी की. मेहलुआ चौराहे के रास्ते गुरोद पहुंचे प्रभारीपर्यवेक्षक जयवर्धन सिंह की अगवानी के लिये इंकानेता देवेन्द्र राठौर और आनंद प्रताप सिंह नें अपने बहुत सारे सहयोगियों के साथ मिलकर की. यहां से पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार सिरोंज से साथ आ रहे रवि उपाध्याय के अलावा वरिष्ठ कार्यकर्ता के रूप में देवेन्द्र राठौर और आनंद प्रताप सिंह  आगे की यात्रा में विधायक जयवर्धन सिंह  के साथ गाडी. में हमसफर हो गये जिनके मार्गदर्शन में कार्यकर्ताओं के एक और दल नें अंडिया में युवा कांग्रेसजनों ने संगठन भाव से उनका स्वागत किया.

गुरोंद में जब जयवर्धनसिंह की अगवानी और स्वागत के लिये अशोक वीर सिंह रघुवंशी (गजार) के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के द्वारा किये गये स्वागत से जयवर्धन अभिभूत हो गये. यहां से अशोकवीर (विप्पे) द्वारा कार्यकर्ताओं के वाहनों का लम्बा काफिला राजनीतिक गतिविधि के रूप में जनता में भी आकर्षण का केन्द्र रहा. गुरोंद में हुए स्वागत पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए जयवर्धन नें माना कि विदिशा में कांग्रेस में सक्षम और प्रतिभावान युवा प्रतिभाओं की अनदेखी अब नहीं होनी चाहिये और संगठन के प्रति लगाव रखने वाले युवाओं को जुड.ना चाहिये.

गुलाबगंज में तो कांग्रेस संगठन के प्रति अपनी भावना को व्यक्त करने के लिये बहुत सारे वरिष्ठ इंकाजनों की मौजूदगी रही. यहां इंकानेता शशांक भार्गव , ऱणधीर सिंह दांगी, राकेश कटारे, रईस अहमद कुरैशी सहित बडी. संख्या में स्थानीय कार्यकर्ता ,पूर्व एवं वर्तमान पदाधिकारी और जनपद और ब्लाक की ग्रामीण इकाईयों से जुडे.लोगों ने अपनी भागीदारी की. गुलाबगंज में जयवर्धन सिंह नें बहुत सारे प्रतिनिधिमंडलों से बातचीत की.व्यापारियों के समूह के साथ मंत्रणा की. विदिशा में जालोरी गार्डन में हुए संगठनात्मक गतिविधि में निजी भागीदारी के लिये कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं नें बहुत बडी तादाद में शिरकत की. विदिशा में कांग्रेस के ब्लाक प्रमुख वीरेन्द्र पीतलिया, मुन्नालाल जैन , पूर्व नपाध्यक्ष अशोक ताम्रकार, नपाउपाध्यक्ष बसंत जैन, नारायण सिंह दांगी ,मनोज कपूर ,पंकज जैन, महेन्द्र वर्मा,आशीष भदौरिया, बिट्टू भदौरिया,मोहित सिंह रघुवंशी, सुशील शर्मा, अर्पित उपाध्याय ,सुजीत देवलिया ,डा. निशीथ मिश्रा,  राजेश दानेन्द्र दुबे, मेहमूद कामिल, रहमान राईन , अनुज लोधी, रवि साहू , आईटी सेल के दशन राजा, सचिन जैन,अजय कटारे आदि संगठन से जुडे सैंकडों कार्यकर्ता इस दौरान जयवर्धन सिंह से सीधे-सीधे अपनी बात कहने में कामयाब रहे.इस दौरान एक पत्र परिषद भी हुई.

अपने संक्षिप्त भाषण में जयवर्धनसिंह नें स्पष्ट कर दिया कि नबंबर के चुनाव के लिये य़ोग्य प्रत्याशियों का चयन ही राज्य कांग्रेस  वरिष्ठ नेताओं की पहली प्राथमिकता है.लेकिन वे अपने पूरे दौरे के दौरान कांग्रेसजनों में भारी उत्साह से बहुत प्रभावित रहे. मध्यप्रदेश का कांग्रेस राजनीति में सर्वाधिक जमीनी कार्यकर्ताओं से जुडे.नेता दिग्विजय सिंह के पुत्र होने के अलावा स्वयं एक प्रतिभाशाली नौजवान के रूप में जयवर्धन एक कुशाग्र बुद्धि के नेता हैं. वे भले ही स्वागत , वंदन , अभिनंदन और सत्कार की विदिशाई परंपरा से चहके हुए नजर आये लेकिन जिस गंभीर मकसद को लेकर वे विदिशा पहुंचे थे उसके संबंध में वे बहुत संवेदनशील रूप से अपना काम करते रहे.

राज्य कांग्रेस में वरिष्ठ कांग्रेस नेता कमलनाथ की कोर टीम बहुत तेजी से राज्य में भाजपा का सामना करने की तैयारी में जुट गई है.इस टीम के परामर्शानुसार मौजूदा कांग्रेस के पूर्व चुनाव में विजयी रहे विधायकों को कुछ महत्वपूर्ण और हारी हुई विधानसभा क्षेत्रों का प्रभारी बनाया है. इन विधायकों को नीतिगत रूप से एक प्रश्नावली के आधार पर संबंधित विधानसभाओं की रिपोर्ट तैयार करने को कहा गया है.

विधायक जयवर्धन विदिशा के मामले में बहुत गंभीर से अपनी रिपोर्ट प्रदेश आळाकमान को सौंपनी थी. इस रिपोर्ट को 15- 16 मई तक निश्चित रूप से सौपा जाना था. इस रिपोर्ट में विदिशा से संभावित प्रत्याशियों के लिये प्रयोजित किये जा रहे समस्त प्रत्याशियों के मौजूदा राजनीति प्रभाव,कांग्रेसजनों के मध्य सहजस्वीकार्यता पर अचूक रिपोर्ट प्रस्तुत करनी थी. कांग्रेस की मौजूदा राजनीति और कथित गुटबाजी से अलहदा स्वीकार्यता और सेबोटेज को लेकर बननें वाली परिस्थितियों का मुकाबला करने की क्षमता , आर्थिक स्थिति और संगठन में बीते बर्षों में सक्रिय योगदान और भूमिका वाले प्रत्याशियों की पहचान कर विदिशा में कांग्रेस की विजय का मार्ग प्रशस्त करने वाले सुझाव देने थे. इसी के आधार पर विदिशा में प्रत्याशी का चयन होना है. फिलहाल जो नाम सामने आये हैं उनमें इंकानेताओं की फेहरिस्त लंबी जरूर होती नजर आती है परन्तु अंतिम चयन में जीतने की सर्वाधिक प्रत्याशा वाले प्रत्याशी का ही चयन होना है. प्रमुख दावेदारों में शशांक भार्गव, रणधीर सिंह दांगी , राकेशकटारे ,नारायण सिंह दांगी , आनंद प्रताप सिंह , आशीष भदौरिया, महेन्द्र वर्मा और रवि साहू शामिल हैं.लेकिन इस सूचि से अलहदा अशोक ताम्रकार एवं बसंत जैन का भी नाम विचार में रखा जाना है. ये बात जयवर्धन नें स्वयं अपने संभाषण के दौरान साफ कर दी थी कि विदिशा में कांग्रेस के जीतने की सर्वाधिक संभावना वाले प्रत्याशी पर जोर दिया जायेगा. राज्य कांग्रेस की ओर से सर्वमान्य सूची तैयार करने के दौरान गुटबाजी की अपेक्षा कांग्रेस संगठन को विजय मिले इस पर जोर दिया जाना जयवर्धन की यात्रा का मकसद रहा.

शिवराज इनाम देते हैं सिर्फ एक बार….

ये बात निर्विवाद रूप से अकाट्य है कि विदिशा में भारतीय जनता पार्टी के किसी भी प्रत्याशी को शिकस्त दे पाना मुश्किल है. कारण भारतीय जनता पार्टी का मजबूत संगठन और इस संगठन के प्रति जनसमुदाय की स्थायी आत्मीयता. विदिशा शहर के मतदाताओं की भाजपा में अभिरूचि के चलते इसे भाजपा प्रत्याशियों के लिये सर्वाधिक सुरक्षित माना जाता रहा है. भाजपा ने लगातार इस सीट पर विजय श्री का वरण कर इतिहास रचा है. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के व्यक्तिगत रूचि के कारण यहां प्रत्याशी के चयन का जिम्मा भी लगभग उन्हीं का होता है. संगठन के मजबूत रहनेके अलावा आरएसएस के तंत्र की मजबूती बीजेपी के किसी भी प्रत्याशी को यहां से जीतने का अवसर सुगम बना देती है. लेकिन शिवराज सिंह चौहान की इस अंचल बिशेष को लेकर जो निजता है वह निश्चित रूप से प्रत्याशी के चयन में प्रभावी तथ्य होगी.

ढाई दशक से भी अधिक समय से शिवराज सिंह चौहान का विदिशा के भाजपा कार्यकर्ताओं से सीधा और निजी सरोकार रहा है. शिवराज सिंह चौहान का राजनीतिक कद अब बहुत बडा. हो चुका है.उनसे की जाने वाली आशायें भी बहुत बडी-बडी. है , उनके नये और पुराने समर्थकों की कोई कमी नहीं है.लगभग हरेक कार्यकर्ताओं की उनसे बडी अपेक्षा है. पूर्व विधायक मोहर सिंह ठाकुर एक समय उनके बहुत प्रिय पात्र रहे किन्तु न जाने किस मजबूरी के चलते वे विदिशा में पनी विधानसभा की दावेदारी से हाथ धो बैठे. उनकी उत्तराधिकारी सुशीला ठाकुर को विधायक पद का इनाम मिला एक बार. शिवराज के अनन्य समर्थक समझे जाने वाले बाबूलाल ताम्रकार को जिला सहकारी बैंक का अध्यक्ष पद मिला लेकिन दूसरी बारी में वे कुछ पा न सके. उनके पुत्र सचिन ताम्रकार को बैंक पर काबिज होंने की दिली आकांक्षा को फिलहाल मारना पडा. सालों की भाजपा के प्रति वफादारी का इनाम स्वर्गीय गुरूचरण सिंह को विधायकी के रूप में मिला लेकिन दूसरा कोई मौका देने से साफ मनाही हो गई. संगठन में ऐसे अनेक उदाहरण हैं जिनमें शिवराज सिंह सबको साथ लेकर चलने के कारण हर बार किसी न किसी नये चेहरे को मौका देना चाहते हैं. वर्तमान में जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष श्यामसुंदर शर्मा को एक बार प्रमुख पद दिया जा चुका है, अब उन्हें दोबारा कुछ मिल पाने पर संदेह किया जा सकता है. वर्तमान में मुकेश टंडन के विधायकी का दावा तो मजबूत है पर शिवराज का इनाम दुबारा मिलेगा इसमें संदेह हैं. मुकेश टंडन विदिशा में मजबूत भाजपा प्रत्याशी के रूप में हैं, जीत भी जायें लेकिन वे भी अनजान हैं कि भाईसाहब के दिमाग में अभी उनको लेकर क्या चल रहा है. विगत चुनाव में एक बार कल्याण सिंह दांगी को विदिशा का सिरमौर बनाया जा चुका है, उन्हें दोबारा टिकट से नवाजा जायेगा इसकी कोई संभावना नहीं है.

स्व.विधायक गुरूचरण सिंह की बेटी भी सुखप्रीत भी विदिशा भाजपा से टिकट चाहती हैं लेकिन उनके टिकट को लेकर शिवराज सिंह को कोई चिंता प्रतीत नहीं होती ,क्योंकि वे प्रयोगधर्मी हैं और किसी एक लोकप्रिय चेहरे को स्थायी रूप से स्थापित कर भविष्य में स्वयं के क्षेत्र में चुनौतियां बढाना नहीं चाहते. इसी फार्मूले पर उन्होंने मंत्री रामपाल सिंह को दोबारा संसद में भेजने से परहेज रखा. इसलिये विदिशा में भाजपा प्रत्याशी के रूप में वे कोई अपना पुराना वफादार साथी ही चुनेंगे जो अबतक सत्ता की मलाई का स्वाद न ले पाया हो. भाजपानगर मंडल अध्यक्ष पदम सिंह भदौरिया का नाम भी प्रत्याशित है. इसके अलावा भी कुछ नाम ऐसे हैं जो भाजपा की ओर से आ सकते हैं लेकिन फेसला किसी भी हालत में शिवराज सिंह चौहान का ही चलेगा…………